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पोहा खाने का तरीका देख कैलाश विजयवर्गीय ने बांग्लादेशियों को पहचाना !

अपने बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वाले बीजेपी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय एकबार फिर चर्चा में है। इस बार कैलाश विजयवर्गीय अपने अनूठे ज्ञान को लेकर चर्चा में हैं। कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, 'मेरे घर में काम कर रहे मजदूरों के पोहा खाने के स्टाइल से मैं समझ गया कि वह बांग्लादेशी हैं।

Kailash Vijayvargiya

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (24 जनवरी): अपने बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वाले बीजेपी (BJP) के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) एकबार फिर चर्चा में है। इस बार कैलाश विजयवर्गीय अपने अनूठे ज्ञान को लेकर चर्चा में हैं। कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, 'मेरे घर में काम कर रहे मजदूरों के पोहा खाने के स्टाइल से मैं समझ गया कि वह बांग्लादेशी (Bangladeshi) हैं।  इंदौर में गुरुवार को एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि 'जब हाल में ही मेरे घर में एक कमरे के निर्माण का काम चल रहा था तो कुछ मजदूरों के खाना खाने का स्टाइल मुझे अजीब लगा। वे केवल पोहा खा रहे थे। मैंने उनके सुपरवाइजर से बात की और शक जाहिर किया कि क्या ये बांग्लादेशी हैं। इसके दो दिन बाद सभी मजदूर काम पर आए ही नहीं।'

बीजेपी महासचि कैलाश विजयवर्गीय ने कार्यक्रम के दौरान अपने सम्बोधन में यह दावा भी किया कि बांग्लादेश का एक आतंकवादी पिछले डेढ़ साल से उनकी 'रेकी' (नजर रखना) कर रहा था। साथ ही उन्होंने कहा कि 'मैं जब भी बाहर निकलता हूं, तो छह-छह बंदूकधारी सुरक्षाकर्मी मेरे आगे-पीछे चलते हैं। यह देश में आखिर क्या हो रहा है? क्या बाहर के लोग देश में घुसकर इतना आतंक फैला देंगे?'  बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने सीएए की वकालत करते हुए कहा कि 'भ्रम और अफवाहों के चक्कर में मत आइए। सीएए देश के हित में है। यह कानून भारत में वास्तविक शरणार्थियों को शरण देगा और उन घुसपैठियों की पहचान करेगा जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिये खतरा है।'

साथ ही उन्होंने कहा कि 'मैंने ठेकेदार से बात की तो उन्होंने कहा कि ये सस्ते मजदूर दो टाइम खाने और 300 रुपए रोज में सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक काम करते हैं। वहीं, स्थानीय मजदूर 600 रुपये रोज मांगते हैं और सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक ही काम करते हैं। जब मैने मजूदरों से बात की तो वो हिंदी नहीं बोल पा रहे थे। वो ये तक नहीं बता पाए कि वे पश्चिम बंगाल के किस जिले या गांव के रहने वाले हैं। यानी साफ है कि वोट बैंक की राजनीति की खातिर पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में घुसपैठिये बड़ी संख्या में रह रहे हैं और उन्हें कोई रोकने वाला नहीं है। हैरानी की बात है कि ये घुसपैठिये अब इंदौर में भी पहुंचने लगे हैं।  

हालांकि कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं ने जब उनसे उन संदिग्ध लोगों के बारे में सवाल किए, तो उन्होंने कहा कि मुझे शंका थी कि ये मजदूर बांग्लादेश के रहने वाले हैं। मुझे संदेह होने के दूसरे ही दिन उन्होंने मेरे घर काम करना बंद कर दिया था। उन्होंने कहा कि मैंने पुलिस के सामने इस मामले में फिलहाल शिकायत दर्ज नहीं कराई है।  मैंने तो केवल लोगों को सचेत करने के लिये उन मजदूरों का जिक्र किया था।

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(Image Courtesy: Google)


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