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जन्मदिन विशेष: हर किसी के बस में नहीं ‘गुलज़ार’ बन जाना

नई दिल्ली ( 18 अगस्त ): आज गुलजार का 82वां जन्मदिन है। गुलजार के बिना भारतीय सिनेमा कुछ अधूरा सा लगता है। लेखक, निर्देशक, प्रोड्यूशर, शायर, गजलकार, गीतकार जैसी तमाम पहचान उनके नाम जुड़ी हैं। 18 अगस्त 1934 में झेलम जिले के दीना गांव में हुआ था, जो कि अब पाकिस्तान में है। गुलज़ार साहब का असली नाम संपूर्ण सिंह कालरा है। 

चेहरे पर मुस्कान, शरीर पर सफेद कुर्ता और पायजामा ही गुलजार की पहचान है। गुलजार साहब को बचपन में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। उनके सिर बचपन में ही मां और पिता का साया उठ गया था।

गुलजार साहब ने शुरुआती में दिनों में जिंदगी चलाने के लिए बतौर मैकेनिक काम किया और खाली समय में वे कविताएं लिखने लगे। यहीं से वो इंडस्ट्री के संपर्क में आए और बिमल राय, हृषिकेश मुख़र्जी और हेमंत कुमार जैसे नामों के सहायक के तौर पर काम करना शुरू किया। आधिकारिक तौर पर बिमल राय की फिल्म 'बंदनी' में गुलज़ार ने अपना पहला गीत लिखा।

गुलजार साहब सिर्फ लेखक ही नहीं रहे, बल्कि मौका मिलने पर निर्देशक भी बनें। उन्होंने बतौर निर्देशक 1971 में 'मेरे अपने' फिल्म बनाई। मेरे अपने में उन्होंने विनोद खन्ना को लिया। शुरुआती फिल्मों में उनकी पसंद संजीव कुमार रहे, जिनके साथ गुलजार ने कोशिश(1772), आंधी (1974), मौसम (1975), अंगूर(1981) और नमकीन (1982) जैसी फिल्में बनाई।

गुलजार ने बड़े पुरस्कारों के साथ ऑस्कर अवॉर्ड भी मिला है। उन्हें 'स्लमडॉग मिलेनियर' के गाने 'जय हो'  के लिए सर्वश्रेष्ठ गीतकार का ऑस्कर अवार्ड मिल चुका है। 'जय हो' के लिए ग्रैमी अवार्ड से भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।

गुलजार हिन्दी, और पंजाबी में  पकड़ रखते हैं। गुलज़ार साहब को उनके लिखे गाने 'मेरा कुछ सामान के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया।  


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