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संघर्ष के जज्बे को सलाम, बिहार की इन विभूतियों को मिला पद्म पुरस्कार

बिहार (Bihar) को गणतंत्र दिवस (Republic Day) पर केंद्र सरकार (Central Government) ने देश के प्रतिष्टित पद्मविभूषण, पद्मभूषण और पद्मश्री पुरस्कारों की घोषणा कर दी है।

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सौरभ कुमार, न्यूज 24 ब्यूरो, पटना(26 जनवरी): बिहार (Bihar) को गणतंत्र दिवस (Republic Day) पर केंद्र सरकार (Central Government) ने देश के प्रतिष्टित पद्मविभूषण, पद्मभूषण और पद्मश्री पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। देश के पूर्व रक्षामंत्री (Former Defence Minister) और समाजवादी नेता स्व जॉर्ज फर्नांडिस को मरणोपरांत पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया है, जबकि बिहार के अन्य सात विभूतियों को पद्मश्री दिया गया है।श्यामसुंदर शर्मा बिहार के चर्चित कलाकार में गिने जाते हैं। केंद्र सरकार ने उन्हें अब पद्मश्री से नवाजा है, वह यूपी के मथुरा जिला के गोवर्धन गांव के हैं, उनका जन्म 1941 में हुआ था। उनका परिवार कई दशक से बिहार में रह रहे हैं। वह कला एवं शिल्प महाविद्यालय पटना के प्राचार्य भी रह चुके हैं। 1998 में श्यामसुंदर शर्मा को राष्ट्रीय ललित कला अकादमी का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, तो वर्ष 2012 में बिहार सरकार ने अबुल कलाम शिक्षा सम्मान भी दिया था। कई अंतरराष्ट्रीय छापाकला प्रदर्शनियों में उनकी पेंटिंग पुरस्कृत हो चुकी है। नीदरलैंड, फिनलैंड, सर्बिया, अमेरिका सहित कई देशों में कला-यात्रा कर चुके हैं। सफेद सांप (कविता संग्रह), स्याह, देखा-देखी बात (नाटक के संस्मरण), गांधी और सूक्तियां, काष्ठ छापाकला, चित्र परंपरा और बिहार, पटना कलम सहित दर्जनों पुस्तकें लिख चुके हैं।

महान वैज्ञानिक आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत को चुनौती देने वाले महान गणितज्ञ डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह को मरणोपरांत भारत सरकार पद्मश्री देने की घोषणा हुई। भोजपुर जिला के जगदीशपुर निवासी स्व. सिंह ने नेतरहाट से मैट्रिक किया था। पटना साइंस कॉलेज में उन्होंने इंटर में टॉप किया। पढ़ने में इतने तेज थे कि पटना विवि प्रशासन ने उनके लिए नियम में बदलाव किया। स्नातक फाइनल परीक्षा में उन्होंने टॉप किया। उसके में पीजी में दाखिला लिया। हालांकि बाद में विदेश चले गए थे। वर्ष 1969 में  कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की और वॉशिंगटन विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर बन गये। कुछ समय नासा में भी काम किया। ‌उनके गाइड जॉन केली ने अपनी बेटी के साथ विवाह प्रस्ताव दिया, जिसे डॉ. सिंह ने अस्वीकृत करते हुए कहा था कि मुझे अपने देश भारत जाना है। देश की सेवा करनी है। अपने देश के लिए जीना और मरना। 1971 में डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह वापस भारत लौट आये।शादी के बाद उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी। बाद में 1974 में मानसिक रोग से ग्रसित होने के बाद रांची स्थित मानसिक आरोग्यशाला में उन्हें भर्ती कराया गया। 

बिहार सरकार ने उनका इलाज कराया। 74 वर्ष की उम्र में 14 नवंबर 2019 को उनका निधन हो गया। सम्मान की घोषणा होने के बाद भी परिवार वाले नाराज है उनकी नाराजगी इस बात को लेकर है कि अगर यही सम्मान उनके जिंदा रहते मिलता तो ज्यादा खुशी होती। विमल कुमार जैन को भी पद्मश्री सम्मान देने की घोषणा की गई है।समाज सेवा के क्षेत्र में विमल जैन की ख्याति है। खासकर भारत विकास विकलांग न्यास के महासचिव के तौर पर उन्होंने दिव्यांगों के पुनर्वास के क्षेत्र में काफी काम किया है। उन्होंने तीस हजार से अधिक दिव्यांगों को कृत्रिम अंग दिलाने में अहम भूमिका निभायी है। पोलियो से ग्रसित आठ हजार लोगों की सर्जरी करवायी है। वे दधीचि देहदान समिति बिहार के महासचिव भी हैं। इसके अलावा दर्जनों सामाजिक संस्थाओं से वे जुड़कर समाज सेवा में सक्रिय हैं। 


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