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23 अप्रैल को तीसरे चरण का चुनाव, यूपी में इन सीटों पर कड़ी टक्कर

लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण का चुनाव 23 अप्रैल को होगा। इसके उत्तर प्रदेश की दस सीटों मुरादाबाद, रामपुर, संभल, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, बदायूं, आंवला, बरेली और पीलीभीत सीट पर वोट डाले जाएंगे। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी इन 10 सीटों में से 7 सीटें जीतने में सफल रही थी और 3 सीटें सपा को मिली थी। इस बार के सियासी संग्राम में सपा-बसपा-आरएलडी मिलकर चुनावी मैदान में उतरे हैं। महागठबंधन की सपा अगुवाई कर रही है और बीजेपी से उसका सीधा मुकाबला है। इन 10 सीटों में से तीन सीटों पर कड़ा मुकाबला है।

न्यूज 24 ब्यूरो,नई दिल्ली (20 अप्रैल): लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण  का चुनाव 23 अप्रैल को होगा। इसके उत्तर प्रदेश की दस सीटों मुरादाबाद, रामपुर, संभल, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, बदायूं, आंवला, बरेली और पीलीभीत सीट पर वोट डाले जाएंगे। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी इन 10 सीटों में से 7 सीटें जीतने में  सफल रही थी और 3 सीटें सपा को मिली थी। इस बार के सियासी संग्राम में सपा-बसपा-आरएलडी मिलकर चुनावी मैदान में उतरे हैं। महागठबंधन की सपा अगुवाई कर रही है और बीजेपी से उसका सीधा मुकाबला है। इन 10 सीटों में से तीन सीटों पर कड़ा मुकाबला है।

कल्याण सिंह की राजनीतिक विरासत संभाल रहे राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया एटा लोकसभा सीट से एक बार फिर बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में उतरे हैं। सपा ने उनके खिलाफ पूर्व सांसद देवेंद्र यादव पर दांव लगाया है। जबकि बाबू सिंह कुशवाहा की जन अधिकार पार्टी से सूरज सिंह मैदान में हैं, जिन्हें कांग्रेस समर्थन कर रही है। कल्याण सिंह के सियासी प्रभाव वाले एटा में सपा-बसपा और आरएलडी मिलकर बीजेपी के दुर्ग को भेदने की कवायद में है। सपा के देवेंद्र सिंह दलित, मुस्लिम और यादव मतों को एकजुट करने में सफल रहते हैं, तो राजवीर के लिए अपनी सीट बचाना बड़ी चुनौती होगी। हालांकि इस सीट पर लोध और शाक्य मतदाताओं की तादाद अच्छी खासी है, जिसके सहारे बीजेपी एक बार फिर से कमल खिलना चाहती है।

आंवला लोकसभा सीट पर बीजेपी से मौजूदा सांसद धर्मेंद्र कश्यप, गठबंधन की ओर से बसपा के रुचिविरा और कांग्रेस से कुंवर सर्वराज सिंह सहित 14 उम्मीदवार मैदान में है। रुचिविरा बिजनौर की रहने वाली हैं, उनके लिए ये क्षेत्र पूरी तरह से नया है। ऐसे में उनकी राह में बाहरी होना सबसे बड़ी बाधा बन रही है। वहीं सर्वराज सिंह इस सीट से सांसद रह चुके हैं और सपा छोड़कर कांग्रेस से चुनावी मैदान में उतरे हैं। इसके अलावा धर्मेंद्र कश्यप इस इलाके से आते हैं और हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय में काफी अच्छी पकड़ है। इस तरह आंवला का सियासी संग्राम त्रिकोणीय मुकाबला होता नजर आ रहा है। आंवला के जातीय समीकरण को देखें तो सबसे ज्यादा साढ़े तीन लाख दलित, डेढ़ लाख राजपूत, एक लाख ब्राह्मण, डेढ़ लाख यादव, एक लाख जाट, एक लाख लोध और ढाई लाख मुस्लिम मतदाता हैं।

बरेली लोकसभा सीट से बीजेपी ने अपने मौजूदा सांसद संतोष गंगवार को चुनावी मैदान में उतारा है। जबकि कांग्रेस से प्रवीण सिंह ऐरन और सपा से भगवत शरण गंगवार चुनाव मैदान में उतरे हैं। पिछले तीन दशक से इस सीट पर बीजेपी का एकछत्र राज रहा है। संतोष कुमार गंगवार सात बार इस सीट से चुनावी जंग फतह कर चुके हैं, इसीलिए सपा ने भगवत शरण गंगवार पर दांव खेला है, लेकिन इस सीट पर सपा कभी जीत नहीं सकी है। बरेली के जातीय समीकरण को देखें सबसे ज्यादा पांच लाख मुस्लिम, साढ़े तीन लाख कुर्मी, सवा लाख राजपूत, सवा लाख ब्राह्मण और दो लाख वैश्य मतदाता हैं। कांग्रेस के प्रवीण ऐरन 2009 में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल कर चुके हैं। ऐसे में एक बार फिर मुस्लिम और वैश्य समीकरण के जरिए एक बार फिर गंगवार को मात देना चाहते हैं।

(Images Courtesy:Google)


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