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खुद का ही था बैंक, बदलवा लिए 1 करोड़ 57 लाख

नई दिल्ली (12 दिसंबर): नोटबंदी के साथ ही सहकारी बेंकों के जरिए काले धन को सफ़ेद किए जाने के कई मामले सामने आ रहे हैं। जयपुर की एक और को-ओपरेटिव बैंक पर एक बिजनेसमैन के काले धन को सफ़ेद किए जाने का आरोप लगा है। पिछले तीन दिनों से इस बिजनेसमैन के घर और ठिकानों के साथ बैंक पर भी इनकम टैक्स विभाग के छापे की कारवाही की और अब तक करीब 1.56 करोड़ रूपये की अघोषित नकदी को ब्लैक से व्हाइट किए जाने का खुलासा हुआ है।

जयपुर में मानसरोवर के स्थित सेंट विल्फ्रेड कोलेज छात्रों को विभिन्न कोर्स कराने के अलावा यहां टीचर ट्रेनिंग की भी व्यवस्था हैं। जाहिर है कि राजस्थान यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त होने के कारण छात्र भी काफी तादात में मुंह मांगी फ़ीस देकर यहां प्रवेश लेते हैं, लेकिन इसके मालिक केशव पर आरोप लगा है कि उन्होंने बंद हो चुके 500 और 1000 के नोटों को इतनी आसानी से बदलवा लिया कि शायद आप और हम तो उसका 3 से 4 फीसदी हिस्सा भी नहीं बदलवा पाए।

यह सब हुआ कालेज में बने को-ओपरेटिव बैंक के जरिए। सूत्रों की माने तो 9 दिसंबर को आयकर विभाग की एक टीम दिल्ली से आई, जिसने इस कोलेज के मालिक से 1.57 करोड़ की अघोषित नकदी जब्त की है। ख़ास बात यह भी है कि इसमें से भी 1.38 करोड़ रुपए तो दो हजार के नए नोटों की शक्ल में हैं।

आरोपों को माने तो विल्फ्रेड शिक्षण संस्था ने 1 से 8 दिसंबर के बीच इंटीग्रल को-ऑपरेटिव बैंक में एक करोड़ तीस लाख रुपये के नए नोट जमा करवाए थे। इसके बाद सोमवार को आयकर विभाग ने बैंक अधिकारियों से पूछताछ की और जमाकर्ता केशव बड़ाया के एक करोड़ 38 लाख रुपये जब्त कर लिए। जब्त किए गई राशि में 2 हजार रुपए के कुल 6,904 नोट जबकि 500 रुपए के 4 नए नोट शामिल हैं।

इस घटना के सामने आने के बाद से ही विल्फ्रेड शिक्षण संस्था के चीफ केशव बड़ाया फरार है, लेकिन समझा जा रहा है कि कुछ राशि को यहां बदली कराने के बाद अपनी ब्लैकमनी को केशव बड़ाया ने किसी अन्य बैंक खाते से अवैध रूप से निकालकर इंटीग्रल को-ऑपरेटिव बैंक में जमा करवाया था।


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