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40 रुपये किलो भी नहीं बिक रही किसान की दाल, आम आदमी को चुकाने पड़ रहे हैं 100 रुपये

नई दिल्ली (27 अप्रैल): 40 रुपये की अरहर दाल के लिए आम आदमी को 100 रुपये से भी ज्यादा खर्च करने पड़ रहे हैं। देश के किसानों को अपने खून-पसीने से उगाई गईं अरहर के लिए 40 रुपये भी नसीब नहीं हो रहे तो आम आदमी के किचन तक पहुंचते-पहुंचते अरहर 60 रुपये से भी ज्यादा महंगी हो जाती है? यही हाल दूसरी दालों का भी है। आखिर, आम आदमी के साथ धोखा और किसानों के साथ महाधोखा कौन कर रहा है?

कश्मीर से कन्याकुमारी तक और कच्छ से कामरुप तक हिंदुस्तान का कोई हिस्सा ऐसा नहीं, जहां बिना दाल के खाना मुक्कमल होता हो। जिस अरहर की दाल को आप 100 रुपये या उससे ज्यादा कीमत पर दुकान से खरीद कर लाते हैं। उस अरहर के लिए किसान को 40 रुपये भी मुश्किल से नसीब हो रहे हैं या 40 रुपये भी नसीब नहीं हो रहे हैं।

खुदारा बाजार में अरहर दाल की कीमत जानने के लिए न्यूज़ 24 की टीम कई बाजारों में पहुंचीं।

- दिल्ली में तो पैकेट में बंद अरहर की दाल 114 रुपये किलो में बिक रही है।

- लखनऊ में 90 से 100 रुपये किलो

- पटना में 85 से 90 रुपये किलो

- अहमदाबाद में 90 से 100 रुपये किलो

- मुंबई में 80 से 90 रुपये किलो

- चंडीगढ़ में 90 से 95 रुपये किलो

- भोपाल में 85 से 95 रुपये किलो

पिछले साल अरहर दाल की कीमतें 200 रुपये किलो पार कर गईं थी। सवाल उठने लगा कि देश किसान जरुरत पर दाल नहीं उगा पाते। देश किसानों ने अरहर की बंपर खेती की। मौसम ने भी साथ दिया और रिकॉर्ड अरहर की पैदावार हुईं। महाराष्ट्र में किसान इतनी अरहर लेकर खरीद केंद्रों पर पहुंच गए कि सरकार ने अरहर की खरीद पर रोक लगा दी।

फड़णवीस का दावा है कि महाराष्ट्र में दूसरे राज्यों के मुकाबले 45% अधिक अरहर की दाल खरीदी गई है, लेकिन किसानों की सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि वो अपनी अरहर लेकर कहां जाएं? किसानों को अरहर की लागत नहीं मिल पा रही है। अब अरहर की खेती करनेवाले किसान खून के आंसू रो रहे हैं।

मुंबई की मंडियों में किसानों को एक क्विंटल अरहर के बदले खुले बाजार में 4000 से 4200 रुपये ही मिल रहे हैं। जबकि सरकार ने अरहर का न्यूनतम समर्थन मुल्य 5000 रुपये क्विंटल तय किया है। मतलब, किसानों को MSP से भी बहुत कम कीमत मिल रही है।

दाल कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि सरकार को कोई ऐसा रास्ता निकालना चाहिए, जिससे किसानों और आम ग्राहकों दोनों को फायदा हो। महाराष्ट्र की मंडियों में अरहर की कीमतें लगातार नीचे गिर रही हैं। अकोला में अरहर की कीमतें गिरकर 3,800 रुपये क्विंटल तक पहुंच गईं जो सरकार द्वारा तय की गई कीमत से 1,200 रुपये कम है। महाराष्ट्र में इस साल अरहर की पैदावार तीन गुना ज्यादा हुई है।

महाराष्ट्र में अरहर की बंपर पैदावार होने का असर देश की दूसरी मंडियों पर भी पड़ा। अब अरहर की दाल मारी-मारी फिर रही है। छह महीने तक हाड़ तोड़ मेहनत करने वाले किसानों को मुनाफा तो छोड़िए लागत भी नहीं मिल रही है। आम आदमी के किचन में अभी भी महंगी दाल ही पहुंच रही है? मतलब, एक किलो अरहर पर करीब 60 रुपये की मलाई कोई और खा रहा है?


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