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भारत ने पाकिस्तान के ताबूत में ठोंक दी आखिरी कील, अब सुनाई देंगी इमरान खान की चीख

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर की सोमवार को जब चीन के शीर्ष अधिकारियों से बात होगी तो पाकिस्तानी ताबूत में आखिरी कील ठोंके जाने की आवाजें आयेंगी और उसके बाद इमरान खान की चीखें सुनाई देंगी

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (11 अगस्त): अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष दर्जे को खत्म करने के बाद इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंच पर घसीटने की इमरान खान की कोशिशों के ताबूत में  भारत ने आखिरी कील ठोंक दी है, बस उसका ऐलान बाकी है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर की  सोमवार को  जब चीन के शीर्ष अधिकारियों से बात होगी तो पाकिस्तानी ताबूत में आखिरी कील ठोंके जाने की आवाजें आयेंगी और उसके बाद  इमरान खान की चीखें सुनाई देंगी।

फिल्हाल भारत मौजूदा माहौल के बीच अपना पक्ष रखेगा और चीन को आश्वस्त करेगा कि जो भी कदम उठाए गए हैं वह पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार दौरे से ठीक पहले चीन से सकारात्मक संकेत मिले हैं। यह दौरा पाकिस्तान के विदेश मंत्री के चीन दौरे के ठीक बाद हो रहा है। ऐसी जानकारियां मिल रही हैं कि भारत-चीन के बीच इस मुद्दे पर लगातार संवाद जारी है और जो भी उलझन होगी उसे दूर कर लिया जाएगा। भारत को विश्वास है कि जयशंकर के दौरे के बाद चीन का भी स्टैंड बदल जाएगा।

हालांकि एस. जयशंकर की यह यात्रा पूर्व नियोजित थी। इसका संबंध मौजूदा परिस्थितियों से बिल्कुल भी नहीं था, लेकिन पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी दो दिन पहले ही चीन के सामने अपना दुखड़ा रो कर आये हैं। इस दृष्टिकोण से एस. जयशंकर की चीन यात्रा और महत्वपूर्ण हो गयी है। उनकी यात्रा का मूल मकसद तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच अक्टूबर में भारत में होने वाले दूसरे शिखर सम्मेलन के डेट को अंतिम रूप देने के लिए हो रही है। यह शिखर वार्ता पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हो सकती है। भारत ने यह भी कहा है कि मामला अगर यूएन की सुरक्षा परिषद तक पहुंचा तो पाकिस्तान की हालत और बदतर होगी क्योंकि 15 स्थायी-अस्थायी सदस्य देशों में कम से कम 12 देशों ने भारत का खुलकर सपॉर्ट करने का भरोसा पहले ही जता दिया है। हालांकि, चीन दौरे से लौटे पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने रविवार को कहा कि पाकिस्तान इस मामले को सुरक्षा परिषद में उठाएगा और उसे पेइचिंग का साथ मिलेगा।

भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने दो टूक लहजे में स्पष्ट कर चुका है कि जम्मू-कश्मीर पर लिया गया उसका फैसला आंतरिक मामला है। दूसरी तरफ, पाकिस्तान लगातार तमाम देशों से संपर्क कर भारत की शिकायत कर रहा है। हालांकि, उसे इसमें मायूसी ही मिली है। जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने के बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान चीन, सऊदी अरब, तुर्की, मलयेशिया समेत तमाम देशों से संपर्क कर चुके हैं। रविवार को उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी से भी फोन पर बात की।

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान भारत के कदम को ऐंटी मुस्लिम बताकर खासकर मुस्लित बहुल देशों से समर्थन मांग रहे हैं। लेकिन इमरान खान को सबसे बड़ा झटका मुस्लिम बहुल देशों से ही मिला है। मध्य-पूर्व के देशों से पाकिस्तान को बिल्कुल भी समर्थन नहीं मिला है। लगभग सभी देशों ने इस मुद्दे से पल्ला झाड़ते हुए दोनों देशों को आपसी बातचीत से सुलझाने को कहा है।

Images Courtesy: Google


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