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मां बेचती है मछली और पिता किसान, मेहनत कर बेटा बना भारतीय फुटबॉल टीम का कप्तान

नई दिल्ली(4 अक्टूबर): भारत में सभी खेलों में क्रिकेट को सबसे महत्व दिया जाता है, लेकिन अब धीरे-धीरे फुटबॉल की लोकप्रियता भी बढ़ती जा रही है। एक जमाने में कोलकाता फुटबॉल का गढ़ हुआ करता था, लेकिन अब देश के कई हिस्सों में फुटबॉल जमकर खेल जा रहा है और कई खिलाड़ी भी सामने आ रहे हैं। आप इस बात का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि फीफा अंडर 17 वर्ल्ड कप भारत में हो रहा है। मेजबानी कर रहा भारत टूर्नामेंट में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है।  

फुटबॉल का जुनून ऐसा कि गरीबी में भी फुटबॉल का साथ नहीं छोड़ा और टीम इंडिया की अंडर-17 टीम में शामिल हुए। 8 अक्टूबर से फुटबॉल का महाकुंभ यानी अंडर-17 वर्ल्ड कप की शुरुआत हो रही है। इसमें कुल 24 टीमें खेलेंगी। 52 मैच होंगे। इसका फाइनल 28 अक्टूबर को कोलकाता में होगा। 

इस मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं भारतीय फुटबॉल के खिलाड़ियों की कहानी। कैसे जिद और जुनून के चलते उन्होंने टीम में जगह बनाई।

अमरजीत सिंह

मणिपुर के अमरजीत सिंह को टीम का कप्‍तान चुना गया। अमरजीत सिंह कियाम के पिता किसान हैं जबकि मां मछली बेचती है। मणिपुर के थाउबाल जिले की हाओखा ममांग गांव के अमरजीत के लिए फुटबॉल खेलना प्रारंभ करने से लेकर कप्‍तान बनने तक का सफर आसान नहीं रहा। अमरजीत ने कहा, "मेरे पिता किसान हैं और खाली समय में बढ़ई का काम करते है, मेरी मां गांव से 25 किलोमीटर दूर जाकर मछली बेचती है ताकि मेरा फुटबॉल खेलने के सपना पूरा हो सकें।"   


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