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ये हैं वो बड़बोले नेता, जिनके बयान बने सुर्खियां

चुनावी मैदान धधक रहा है। तीसरे चरण की वोटिंग जारी है, महाराष्ट्र में भी मतदान करने के लिए लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं। देश में 117 सीट पर वोट डाले जा रहे हैं, जिसमें महाराष्ट्र 15 सीटों पर वोटिंग चल रही है।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (23 अप्रैल): चुनावी मैदान धधक रहा है। तीसरे चरण की वोटिंग जारी है, महाराष्ट्र में भी मतदान करने के लिए लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं। देश में 117 सीट पर वोट डाले जा रहे हैं, जिसमें महाराष्ट्र 15 सीटों पर वोटिंग चल रही है। प्रचार की तोपें ठंडी पड़ गई हैं, ऐसा कहने की प्रथा है। जिस तरीके से प्रचार का स्तर नीचे गिरा है उसे तोप कहें या फिर गटर के पानी की पिचकारी कहें? यह सवाल मतदाताओं के मन में निश्चित ही उठ रहा होगा। चुनाव संसद का है, लेकिन मर्यादाहीन शब्दों का इस्तेमाल खूब किया जा रहा है। चुनाव में नरेंद्र मोदी की सुप्त लहर है। इस लहर की झाग दिखाई नहीं दे रही है, उसकी आवाज भले ही सुनाई नहीं दे रही है मगर इस लहर का अनुभव मतदान के दिन निश्चित ही होगा, ऐसा आत्मविश्वास मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जताया है जो सार्थक है। तीसरे चरण में शरद पवार और फडणवीस के बीच संघवाली हाफ चड्ढी को लेकर झगड़ा हुआ है। अमित शाह बारामती में प्रचार के लिए गए और शरद पवार का तंबू उखाड़ने की बात उन्होंने कही। इस पर ‘ये मेरा क्या उखाड़ेंगे? जो उखाड़ना है उसे उखाड़ो। ऐसा पवार ने चेताया है। किसको बढ़ाना है और किसको उखाड़ना है? यह अंतत: जनता को तय करना है, जनता अपनी जेब में है, इस भ्रम में कोई नेता न रहे है।  वंचित बहुजन आघाड़ी के प्रकाश आंबेडकर ने अब घोषणा की है कि लोकसभा नतीजों के बाद नरेंद्र मोदी सिर्फ जेल में नहीं होंगे बल्कि अंडासेल में होंगे। प्रधानमंत्री के बारे में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना उचित नहीं। आंबेडकर के वंचित बहुजन आघाड़ी के ‘अंडे’ अभी फूटने हैं इसलिए उन्हें अंडे को पूर्णत: सेने के बाद उसमें से मुर्गी बाहर आने तक संयम से बोलना चाहिए था। भोपाल में भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार प्रज्ञा सिंह ठाकुर द्वारा हेमंत करकरे पर मारी गई पिचकारी का भी समर्थन नहीं किया जा सकता। मालेगांव बम विस्फोट की जांच के बारे में हमने भी कुछ शंकाएं उपस्थित की थीं। हिंदुओं को बदनाम मत करो और ‘हिंदू आतंकवाद’ इस शब्द पर जोर मत दो, ऐसी हमारी नीति थी।मालेगांव बम विस्फोट मामले की जांच राजनीतिक दबाव तले होने की बात हमने तब कही थी और इस मामले में साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित का खुला समर्थन करते हुए लड़नेवाला सिर्फ ‘सामना’ ही था। लेकिन वही हेमंत करकरे 26/11 के आतंकी हमले में पाकिस्तानी आतंकवादियों की गोलियों की बलि चढ़े और उन्होंने देश के लिए अपनी शहादत दी। उन्हें देश ने मरणोत्तर सर्वोच्च ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित किया। ऐसे करकरे का ‘देशद्रोही’ के रूप में उल्लेख करना घृणास्पद है।देश के लिए शहादत देनेवाले सभी वीर जवानों का यह अपमान होगा।चुनाव की चकाचौंध में कम-से-कम देश के लिए बलिदान देनेवाले लोगों पर इस तरह कीचड़ नहीं उछाला जाना चाहिए। प्रज्ञा सिंह भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार हैं और प्रधानमंत्री श्री मोदी जवानों की कुर्बानी तथा शौर्य पर ही लोगों में राष्ट्रभक्ति की चेतना जगा रहे हैं और उसी समय शहीदों के शौर्य को देशद्रोह कहने से प्रधानमंत्री की प्रतिमा को धक्का लगता है। आज प्रधानमंत्री की प्रतिमा और चेहरा ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की पूंजी है।


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