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CAA के खिलाफ दायर याचिकाओं पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के खिलाफ चल रहे विरोध के बीच बुधवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में इस कानून के खिलाफ रिकॉर्ड 133 याचिकाएं दायर की गई हैं।

Supreme Court, सुप्रीम कोर्ट

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प्रभाकर मिश्रा, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(21 जनवरी): नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के खिलाफ चल रहे विरोध के बीच बुधवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में इस कानून के खिलाफ रिकॉर्ड 133 याचिकाएं दायर की गई हैं। इन याचिकाओं में कांग्रेस नेता (Congress Leader) जयराम रमेश AIMIM नेता असउद्दीन ओवैसी, आल असम स्टूडेंट यूनियन, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग सहित कई मुस्लिम संगठनों की याचिका शामिल है। दो याचिकाएं इस कानून के समर्थन में भी दायर की गई हैं। इनमें से एक याचिका बीजेपी नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है। मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे, जस्टिस अब्दुल नजीर और जस्टिस संजीव खन्ना की तीन सदस्यीय बेंच सुनवाई करेगी।

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने दो और याचिका दायर की है। अपनी पहली याचिका में लीग ने सीएए को लागू करने को लेकर 10 जनवरी को जारी की गई अधिसूचना पर रोक लगाने की मांग की है। वहीं दूसरी याचिका में यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि क्या राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) को पूरे देश में लागू किया जाएगा। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने यह भी जानना चाहा है कि क्या एनआरसी और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) से संबंधित प्रक्रिया एक दूसरे से जुड़ी होंगी।

गौरतलब है कि नागरिकता कानून संशोधन संसद के दोनों सदनों में पास होने और उस पर राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद इसके खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हो रहा है। पिछले दिनों देशव्यापी हिंसक प्रदर्शन देखने को मिला। जिसके बाद न केवल सुप्रीम कोर्ट में बल्कि देशभर के अलग-अलग हाईकोर्ट में इसके खिलाफ याचिका दायर की गई है। नागरिकता संशोधित कानून में प्रावधान है कि भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में रह रहे सिख, ईसाई, बौद्ध, हिन्दू, पारसी जिन्हें धर्म के आधार पर प्रताड़ित किया जा रहा हैं, उन्हें नागरिकता देने का प्रावधान है, जबकि, इसमें मुसलमान को बाहर रखा गया है। इस कानून का विरोध करने वालों का ऐतराज इसी बात को लेकर है कि नागरिकता संशोधन कानून में मुसलमानों को अलग क्यों रखा गया है।


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