News

CAA: SC का केंद्र सरकार को नोटिस, 4 हफ्ते बाद होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में CAA को लेकर चल रही सुनवाई 4 हफ्तों के लिए टल गई है। कोर्ट ने केन्द्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए मामले पर जवाब देने के लिए 4 हफ्तों को वक्त दिया है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केन्द्र सरकार का पक्ष सुने बिना इस मामले पर रोक नहीं लगा सकते हैं। मामले की बहस करते हुए कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि CAA और NPR को

प्रभाकर मिश्रा, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 जनवरी): सुप्रीम कोर्ट में CAA को लेकर चल रही सुनवाई 4 हफ्तों के लिए टल गई है। कोर्ट ने केन्द्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए मामले पर जवाब देने के लिए 4 हफ्तों को वक्त दिया है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केन्द्र सरकार का पक्ष सुने बिना इस मामले पर रोक नहीं लगा सकते हैं। मामले की बहस करते हुए कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि CAA और NPR को कम से कम 3 महीने के लिए टाल दिया जाए। अब इस मामले में 4 हफ्ते के बाद सुनवाई होगी। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में इस कानून के खिलाफ रिकॉर्ड 140 याचिकाएं दायर की गई हैं।

इन याचिकाओं में कांग्रेस नेता (Congress Leader) जयराम रमेश AIMIM नेता असउद्दीन ओवैसी, आल असम स्टूडेंट यूनियन, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग सहित कई मुस्लिम संगठनों की याचिका शामिल है। दो याचिकाएं इस कानून के समर्थन में भी दायर की गई हैं। इनमें से एक याचिका बीजेपी नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है। मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे, जस्टिस अब्दुल नजीर और जस्टिस संजीव खन्ना की तीन सदस्यीय बेंच सुनवाई करेगी।

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने दो और याचिका दायर की है। अपनी पहली याचिका में लीग ने सीएए को लागू करने को लेकर 10 जनवरी को जारी की गई अधिसूचना पर रोक लगाने की मांग की है। वहीं दूसरी याचिका में यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि क्या राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) को पूरे देश में लागू किया जाएगा। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने यह भी जानना चाहा है कि क्या एनआरसी और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) से संबंधित प्रक्रिया एक दूसरे से जुड़ी होंगी।

गौरतलब है कि नागरिकता कानून संशोधन संसद के दोनों सदनों में पास होने और उस पर राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद इसके खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हो रहा है। पिछले दिनों देशव्यापी हिंसक प्रदर्शन देखने को मिला। जिसके बाद न केवल सुप्रीम कोर्ट में बल्कि देशभर के अलग-अलग हाईकोर्ट में इसके खिलाफ याचिका दायर की गई है। नागरिकता संशोधित कानून में प्रावधान है कि भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में रह रहे सिख, ईसाई, बौद्ध, हिन्दू, पारसी जिन्हें धर्म के आधार पर प्रताड़ित किया जा रहा हैं, उन्हें नागरिकता देने का प्रावधान है, जबकि, इसमें मुसलमान को बाहर रखा गया है। इस कानून का विरोध करने वालों का ऐतराज इसी बात को लेकर है कि नागरिकता संशोधन कानून में मुसलमानों को अलग क्यों रखा गया है।


Get Breaking News First and Latest Updates from India and around the world on News24. Follow News24 and Download our - News24 Android App . Follow News24online.com on Twitter, YouTube, Instagram, Facebook, Telegram , Google समाचार.

Tags :

Top