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पंजाब सरकार के खोखले दावों से खफा है शहीद का परिवार

पुलवामा हमले (Pulwama Attack) में शहीद हुए दीनानगर के मनिदर सिंह का परिवार सरकार के खोखले दावों से खफा है। शहीद मनिदर के परिवार के मुताबिक सरकारों ने उस समय कई तरह के वायदे किये थे, जिनमें से एक भी वायदा अभी तक पूरा नही किया गया।

विशाल एंग्रीश,नई दिल्ली (14 फरवरी): पुलवामा हमले (Pulwama Attack) में शहीद हुए दीनानगर के मनिदर सिंह का परिवार सरकार के खोखले दावों से खफा है। शहीद मनिदर के परिवार के मुताबिक सरकारों ने उस समय कई तरह के वायदे किये थे, जिनमें से एक भी वायदा अभी तक पूरा नही किया गया। परिवार इन वायदों को लेकर तमाम राजनीतिक नेताओं के पास गए, लेकिन कही कोई सुनवाई नहीं हुई। परिवार के लोग पंजाब के मुख्यमंत्री से तीन बार मिलने भी गए, लेकिन मुख्यमंत्री के पास शहीद के परिवार से मिलने तक का समय नहीं है।

शहीद के पिता सतपाल ने बताया कि प्रधानमंत्री को 23 मार्च 2019 को सीआरपी से पंजाब पुलिस में नोकरी के लिए लेटर लिख था, जिसके बाद कोई जवाब ही नहीं मिला। हालांकि मार्च 2019 में फिर मुख्य्मंत्री ने ट्वीट किया था, उन्होंने इस मामले में लिखा था कि वह परिवार के साथ हैं और डीजीपी को इस मामले को लेकर लिखा है कि वह शहीद के भाई लखवीश को किस तरह पंजाब पुलिस डिपार्टमेंट में ला सकते है। लेकिन उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं होने से शहीद के पिता जो अकेले घर में रहते हैं कि तबियत बिगड़ गई। जिसे देखते हुए लखविश ने अपनी नोकरी छोड़ ।

पिता सतपाल ने मांग करते कहा कि उसके बेटे को पंजाब सरकार नोकरी दे और अर्धसैनिकबलों को भी सेना की तरह बेनिफिट दिए जाए, क्‍योंकि अर्द्धसैनिक के जवान भी देश की सेवा करते हैं। वहीं उन्होंने कहा कि उनका बेटा मनिदर बचपन से ही पढ़ने-लिखने में होशियार था और खेलों में भी काफी रुचि रखता था। मनिदर ने काफी इनाम भी जीते थे। उसका सपना था कि बड़ा ऑफिसर बनकर देश की सेवा की जाए, लेकिन परमात्मा को कुछ ओर ही मंजूर था।

शाहीद के भाई लखवीश सिंह ने बताया कि वह सीआरपीएफ में फतेहगढ़ साहिब में कॉस्टेबल थे। पिता की तबियत खराब होने के कारण वह उनके पास नहीं रह सकते थे। पंजाब सरकार की तरफ से उसे नौकरी का आश्वासन मिला तो उन्होंने जुलाई 2019 में नौकरी यह सोचकर छोड़ दी कि सरकार नौकरी दे देंगी और वह अपने पिता की भी सेवा कर सकेगा। वह अपने पिता के साथ 3 बार मुख्यमंत्री को मिलने भी गया, लेकिन मिलने ही नहीं दिया गया।

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