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नोटबंदी के बाद ज्वेलर्स ने खूब बेचा सोना, उरी हमला और सर्जिकल स्ट्राईक को वजह बताया

नोटबंदी के फैसले के ऐलान के बाद बड़ी संख्या में ज्वेलर्स ने अपनी आय से अधिक अनअकाउंटेड रकम बैंकों में जमा करायी। ज्वेलर्स ने तो सोने की बिक्री में बढ़ोतरी के लिये उरी में आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा किये गये सर्जिकल स्ट्राइक के चलते भारत पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव को जिम्मेदार ठहराया।

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मनीष कुमार, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (20 जनवरी): नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नोटबंदी के फैसले के ऐलान के बाद बड़ी संख्या में ज्वेलर्स ने अपनी आय से अधिक अनअकाउंटेड रकम बैंकों में जमा करायी। जो उन्होंने नगद में सोना बेचकर जमा की। लेकिन बैंकों में जमा किये गये अनअकाउंटेड मनी को लेकर, टैक्स विभाग ने इन ज्वेलर्स से सवाल जवाब किया तो कोई भी ज्वेलर्स संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। कुछ ज्वेलर्स ने तो सोने की बिक्री में बढ़ोतरी के लिये उरी में आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा किये गये सर्जिकल स्ट्राइक के चलते भारत पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव को जिम्मेदार ठहराया। डेटा एनालिटिक्स के ज़रिए ज्वेलर्स के इस गोरखधंधे का खुलासा हुआ है। इन नकद के बड़े लेनदेन के मामलों की जांच चल रही है।

सूत्रों के मुताबिक एक मामला ऐसा सामने आया जिसमें एक ज्वेलर की सलाना आय केवल 64,550 रुपये थी। लेकिन ज्वेलर ने 72 लाख रुपये नोटबंदी के दौरान बैंक खाते में जमा कराये। एक और मामले में एक ज्वेलर की सलाना आय केवल 3.3 करोड़ रुपये थी लेकिन ज्वेलर ने 52.26 करोड़ रुपये नगद बैंक में कमा कराये। जबकि जांच में पाया गया कि 9 नवंबर 2015 को उसके पास केवल 2.64 लाख रुपये नगद थे जबकि 9 नवंबर 2016 को 6.22 करोड़ रुपये नगद पाये गये। यानि 23,490 गुणा ज्यादा नगद लेकिन कोई संतोषजनक सफाई नहीं। गुजरात के एक ज्वेलर ने 9 नवंबर 2016 से लेकर 30 दिसंबर 2016 तक 4,14,93,000 रपये नगद जमा कराये। जबकि इससे पहले वाले वर्ष में उसने केवल 44,260 रुपये जमा कराये थे। यानि नोटबंदी के दौरान 93,648 गुना ज्यादा नगद जमा कराया।

वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक टैक्स विभाग ने नोटबंदी के दौरान कुछ ज्वेलर्स द्वारा जमा किये गये बड़ी मात्रा अनअकाउंटेड रकम की जांच की तो पाया कि इन ज्वेलर्स ने बड़ी संख्या में अनसिक्योर्ड लोन उस दौरान लिया हुआ था। सूत्रों के मुताबिक सभी मामलों में modus operandi करीब-करीब एक जैसा ही था। जिसमें ज्वेलर्स ने ज्यादा नगद जमा कराने के लिये सोने की बिक्री में जबरदस्त बढ़ोतरी को कारण बताया या फिर अक्टूबर महीने में अनरजिस्टर्ड डीलर या व्यक्ति से सोना खरीदने के लिये एडवांस में मिले नगद को कारण बताया। हालांकि स्क्रूटनी के दौरान ये ज्वेलर्स इन खरीदारी के एवज में बिल दिखाने में नाकामयाब रहे।

Images Courtesy: Google


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