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JNU में पहली बार झण्डे को सलामी देंगे एनसीसी के कैडेट, परिसर में मार्च पास्ट भी करेंगे

इस साल सीएए और शुल्क बढोतरी के लिए लंबे समय तक हिंसा और अराजकता के वातावरण के लिए चर्चा में रहे जेएनयू के इतिहास में पहली बार गणतंत्र दिवस पर एनसीसी के कैडेट मार्च पास्ट करेंगे और गार्ड ऑफ ऑनर देंगे।

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(22 जनवरी): सीएए और शुल्क बढोतरी के लिए लंबे समय तक हिंसा और अराजकता के वातावरण के लिए चर्चा में रहे जेएनयू में पहली बार गणतंत्र दिवस पर एनसीसी के कैडेट मार्च पास्ट करेंगे और गार्ड ऑफ ऑनर देंगे।

इस सिलसिले में जेएनयू के वीसी एम. जगदीश कुमार ने एक ट्वीट के जरिए जानकारी दी है कि जेएनयू रिपब्लिक डे की तैयारियों में जुटा हुआ है। वीसी एम जगदीश कुमार ने लिखा है कि यूनिवर्सिटी के एनसीसी कैडेट जेएनयू परिसर में मार्ट पास्ट करेंगे और झण्डे को सलामी भी देंगे।इसीके साथ किये गये एक अन्य ट्वीट में वीसी ने यह जानकारी भी दी है कि शीतकालीन पंजीकरण के लिए लगभग 82 फीसदी छात्रों ने अपने बकाया शुल्क का भुगतान कर दिया है। जेएनयू के विभिन्न होस्टल में लगभग 8500 छात्र रहते हैं। वीसी ने कहा है कि ऐसा अनुमान है कि बाकी छात्र लेट फीस के साथ अपने बाकाया शुल्क का भुगतान कर शीतकालीन पंजीकरण करा लेंगे।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन ने उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले 82 विदेशी नागरिकों की राष्ट्रीयता की जानकारी नहीं है। उसके मुताबिक, जेएनयू विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों के बारे में जानकारी है।जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में पढ़ने वाले विदेशी विद्यार्थी को लेकर चौंकाने वाला राज उजागर हुआ था। कई दिनों से धरने-प्रदर्शन और मारपीट की घटनाओं को लेकर देशभर में चर्चा का केंद्र बने जेएनयू में देश के अलावा 48 देशों के 301 विदेशी विद्यार्थी पढ़ रहे, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 82 विद्यार्थियों के बारे में जेएनयू प्रशासन को यह पता नहीं है कि वे किस-किस देश के हैं। हालांकि, प्रशासन ने दावा किया है कि उसे सभी विद्यार्थियों के बारे में जानकारी है।प्रशासन ने कहा कि आरटीआइ दायर करने वाले ने जवाब का इंतजार किए बिना ऐसी धारणा बना ली कि विश्वविद्यालय के पास आंकड़े नहीं हैं, जोकि गलत है।

राजस्थान में कोटा के सामाजिक कार्यकर्ता सुजीत स्वामी की ओर से दायर की गई एक आरटीआइ से उक्त जानकारी सामने आई है। सुजीत स्वामी ने पांच जनवरी को जेएनयू में एक आरटीआइ लगाकर कुछ सवालों के जवाब मांगे थे। 14 जनवरी को जब जेएनयू प्रशासन से जवाब आया तब इस बात पर्दाफाश हुआ कि 82 विद्यार्थियों के बारे में उन्हें खुद पता नहीं है कि वे किस देश के हैं। सुजीत ने जानकारी मांगी थी कि जेएनयू में कितने विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। किस-किस प्रोग्राम में कितने विद्यार्थी हैं। कितने विदेशी हैं और वे किस-किस देश से आए हैं। विद्यार्थी किस कोर्स में पढ़ रहे हैं।

Images Courtesy:Google


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