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SHOCKING : 'पाक की 53% टीनएज लड़कियां पति के हाथों पत्नी की पिटाई मानती हैं जायज़'

नई दिल्ली (10 फरवरी):  यूनाइटेड नेशन्स पॉपुलेशन फंड (यूएनएफपीए) ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है। जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तान में करीब 53 फीसदी टीनएज लड़कियां मानती हैं कि पति का कम से कम किसी एक वजह से पत्नी की पिटाई करना न्यायसंगत है। 

पाकिस्तानी अखबार 'एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, 15-19 साल की लड़कियों का मानना है कि शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करने पर पति का अपनी पत्नी को मारना न्यायसंगत है। 

'सेक्सुअल एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ ऑफ यंग पीपुल इन एशिया एंड द पैसिफिक' नाम से जारी इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, कि पाकिस्तान में 30 फीसदी से भी ज्यादा लड़कियों ने शारीरिक या यौन हिंसा का अनुभव किया है। इसके आगे कंबोडिया, भारत, बांग्लादेश और नेपाल के आंकड़ों में संकेत दिया गया है, कि महिलाओं के प्रति हिंसा के पक्ष में नज़रिया किशोर लड़कों में आम है। करीब 25-51 फीसदी ने कहा कि पत्नी की पिटाई न्यायसंगत है।

कम स्तर की शिक्षा, बेरोजगारी और पारिवारिक प्रष्ठभूमि इस हिंसा के लिए स्वीकृति के लिए जिम्मेदार हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान उन देशों में से एक है जहां ऐसे किशोरों की संख्या काफी ज्यादा है, जो एचआईबी से पीड़ित हैं। भारत में एचआईबी संक्रमित किशोरों की संख्या सबसे ज्यादा 1,20,000 है। जिसके बाद इंडोनेशिया (46,000), थाईलैंड (11,000), म्यांमार (7,700), पाकिस्तान (7,000), कम्बोडिया (3,500), ईरान (3,200), वियतनाम (2,600) और नेपाल का स्थान आता है।

कुल मिलाकर पाकिस्तान में 15-24 साल के युवकों में केवल 28 फीसदी को पता है कि कॉन्डम के इस्तेमाल से एचआईबी की रोकथाम की जा सकती है। इसके अलावा महिलाओं में इसकी जागरुकता आधे से भी कम है। किशोर लड़कियों की आधी संख्या शॉर्ट एक्टिंग मैथड (पिल्स और कॉन्डम) पर निर्भर रहती हैं।


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