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खुली पोल! UP के इंजीनियरिंग कॉलेजों में 20 हजार टीचर 'फर्जी'

अशोक तिवारी, नई दिल्ली (9 जून): ये खबर उन लाखों छात्रों से जुड़ी है जो इंजीनियर बनना चाहते हैं। कुछ दिनों पहले खबर आई थी कि देश के सबसे बड़े सूबे यूपी के इंजीनियरिंग कॉलेज में 20 हजार फर्जी टीचर पढ़ा रहे हैं। अब एक बार फिर छात्रों के भविष्य़ से खिलवाड़ की खबर आई है। यूपी के सरकारी और निजी इंजीनियरिंग कॉलेज को संभालने वाली एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी ने राज्य के 18 इंजीनियरिंग कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी है। 347 कॉलेज की 22 हजार से ज्यादा सीटें भी कम कर दी हैं। 

उत्तर प्रदेश के लाखों छात्र फिर से इंजीनियर बनने का ख्वाब बुन रहे हैं। सपना संजोए बैठे हैं कि आने वाले दिनों में वो उत्तर प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लेकर इंजीनियर बनेंगे। लेकिन अब एक ऐसी खबर आई है जिसने यूपी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई, उन्हें कराने वाले कॉलेज और पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया है। 

पहले पता चला कि यूपी के इंजीनियरिंग कॉलेज के 20 हजार टीचर फर्जी हैं। अब जब यूपी में इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला शुरु होने वाला है। तब यूपी की एपीजे अब्दुल टेक्निकल यूनिवर्सिटी ने 18 कॉलेज की मान्यता खत्म कर दी। इतना ही नहीं यूपी के इंजनीयरिंग कॉलेजी की 22648 सीटें कम कर दी गई हैं। 

दरअसल उत्तर प्रदेश में इंजीनियरिंग कॉलेज के नाम पर सैकड़ों कॉलेज सिर्फ दुकान की तरह पहलो खोलने दिए गए। लेकिन जब इन इंजीनियरिंग कॉलेज की धीरे धीरे सच्चाई सामने आने लगी तो अब इन इंजीनियरिंग कॉलेज कम पढ़ाई के नाम पर खुली दुकानों का शटर गिर रहा है। 2013 में यूपी के 44 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हुए। 2014 में यूपी के 5 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद किए गए। 2015 में 17 इंजीयनिरंग कॉलेज बंद करने पड़े। 2016 में 18 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद करे गए। पिछले पांच साल में यूपी के 100 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद किए जा चुके हैं।     उत्तर प्रदेश में अब 612 सरकारी और निजी इंजीनियरिंग कॉलेज बचे हैं। यूपी में ऐसे वक्त में 18 इंजीनियरिंग कॉलेज की मान्यता रद्द हुई है जब इंजीनियरिंग में दाखिल का वक्त आ गया है। बताया जाता है कि इनमें से काफी इंजीनयिरंग क़ॉलेज कहने को नामी फैकल्टी दिखाते हैं। लेकिन असलियत में कम तनख्वाह वाले टीचर्स से पढ़ाई कराते हैं। यानी बच्चों का भविष्य दांव पर लगाकर अपनी जेब गरम करते हैं।  इसीलिए बीजेपी इसके पीछे सरकार के भ्रष्टाचार और घोटाले का आरोप लगा रही है।

यूपी में इंजीनियरिंग कॉलेज कुकुरमुत्ते की तरह खोले गए। कहीं खेतों में खोले गए, कहीं शहर से दूर वीराने में। लेकिन उन्हीं इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लेने से बच्चे भागने लगे। पिछले साल हालात थे कि अस्सी फीसदी सीटें खाली रह गई थीं। सवाल ये है कि यूपी में क्यों इंजीनियरिंग के छात्रों के भविष्य़ के साथ ऐसे खिलवाड़ हो रहा है? 


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