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संतोष गंगवार होंगे प्रोटेम स्पीकर, जानिए क्या होता है प्रोटेम स्पीकर का पद ?

भारतीय जनता पार्टी के नेता और वरिष्ठतम लोकसभा सदस्य संतोष गंगवार को 17वीं लोकसभा के लिए प्रोटेम स्पीकर होंगे। संतोष गंगवार आठवीं बार चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं। संतोष गंगवार बरेली से सांसद हैं

प्रभाकर मिश्रा, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (30 मई): भारतीय जनता पार्टी के नेता और वरिष्ठतम लोकसभा सदस्य संतोष गंगवार को 17वीं लोकसभा के लिए प्रोटेम स्पीकर होंगे। संतोष गंगवार आठवीं बार चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं। संतोष गंगवार बरेली से  सांसद हैं। आज  नरेंद्र मोदी लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। इस शपथ ग्रहण के बाद नवनिर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाने के लिए संतोष कुमार गंगवार को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया है, जो नए सांसदों को शपथ दिलाएंगे।

प्रोटेम स्पीकर भारतीय संसदीय कार्यप्रणाली में सबसे कम समय के लिए लेकिन एक बहुत ही महत्वपूर्ण पद होता है । प्रोटेम एक लैटिन फ्रेज शब्द है जिसका अर्थ होता है 'कुछ समय के लिए' यानि अस्थायी। प्रोटेम स्पीकर का निर्वाचन महज कुछ घण्टों के लिए होता है। प्रोटेम स्पीकर अस्थायी स्पीकर होता है जो चुनाव के बाद पहली बैठक की अध्यक्षता करता है। स्पीकर और डिप्टी स्पीकर का चयन संसद के सदस्यों द्वारा किया जाता है जो प्रोटेम स्पीकर के तहत होता है। प्रोटेम स्पीकर को सदन के संचालन के लिए चुना जाता है जब लोकसभा और विधानसभाओं का चुनाव किया गया हो और स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के लिए वोटिंग नहीं हुई हो। एक प्रोटेम स्पीकर को लोकसभा और विधान सभा के सदस्यों के समझौते के साथ चुना जाता है। आमतौर पर, सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य को उस पद के लिए चुना जाता है, जो तब स्थायी स्पीकर चुने जाने तक गतिविधियों को करता है। प्रोटेम स्पीकर का मुख्य कर्तव्य सदन के नए सदस्यों को पद की शपथ दिलाना है। वह सदन को नए अध्यक्ष का चुनाव करने में सक्षम बनाता है। एक बार जब नया स्पीकर चुना लिया जाता है और फ्लोर टेस्ट संपन्न हो जाता है, तब प्रोटेम स्पीकर का वजूद ख़त्म हो जाता है।  

संसदीय व्यवस्था में प्रोटेम स्पीकर का महत्व उस समय बढ़ जाता है जब किसी कारणवश ( जैसे असामयिक मृत्यु, त्यागपत्र इत्यादि )स्पीकर और डिप्टी स्पीकर दोनों पद खाली हो जाता है। ऐसी स्थिति में सदन चलाने की जिम्मेदारी प्रोटेम स्पीकर की होती है। ऐसी स्थिति पहले लोकसभा के दौरान आयी थी जब 27 फरवरी 1956 को लोकसभा के पहले स्पीकर जीवी मावलंकर की असामयिक मौत हो गयी थी।


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