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रेलवे में खाली पड़े हैं रेलवे सेफ्टी के करीब 1.42 लाख पद

नई दिल्ली ( 23 जनवरी ): पिछले कुछ समय में हुई रेल दुर्घटनाओं के पीछे सबसे बड़ी वजह रेलवे सेफ्टी स्टाफ की कमी रही है। इस क्षेत्र में लगातार कर्मियों की कमी चल रही है। इतना ही नहीं जो कर्मी इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं उनके ऊपर काम को लेकर काफी दबाव होता है और उन्हें मिलने वाली सुविधाएं भी नाकाफी हैं। इस बात का जिक्र सरकारी रिपोर्ट में कई बार किया जा चुका है।

शनिवार रात को हुए हीराखंड ट्रेन हादसे में अब तक करीब 39 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि वर्ष 2015-16 में करीब 190 लोगों की मौत ट्रेन हादसों में हुई है। इनमें से भी करीब 190 लोगों की मौत पिछले दो माह के दौरान हुए तीन बड़े ट्रेन हादसों में हुई है।

ट्रेन हादसे के बाद हर बार रेलवे सेफ्टी को लेकर आवाजें उठती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। पिछले पांच माह में छह ट्रेन हादसे हो चुके हैं। हीराखंड एक्सप्रेस हादसे में 39 लोगों की जान गंवाने के बाद फिर इसको लेकर आवाज उठ रही हैं। लेकिन सरकारी आंकड़े बताते हैं कि रेलवे सेफ्टी स्टाफ में करीब 24 फीसद पद रिक्त पड़े हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक देश भर में करीब 1.42 लाख पद रिक्त हैं। जिसे खुलेतौर पर लापरवाही कहा जा सकता है। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक एक अधिकारी ने इन पदों को जल्द से जल्द भरे जाने की आवश्यकता बताई है। रेलवे बोर्ड की जानकारी के मुताबिक अकेले दक्षिण मध्य रेलवे में ही करीब 6,398 इंजीनियर्स की जरूरत है लेकिन यहां पर अब तक करीब 4,827 कर्मी ही काम कर रहे हैं। वहीं 1571 कर्मियों की कमी पूर्वी तटीय रेलवे में भी है। सिग्नल और टेलकम की यदि बात की जाए तो यहां पर करीब 67 सुरक्षा और 93 सिग्नल एंड टेलकाम में और 613 पोस्ट अन्य क्षेत्र में खाली पड़ी हैं।

रेलवे बोर्ड की रिपोर्ट में कहा गया है कि रेलवे सेफ्टी स्टाफ की कमी के चलते सिग्नल, इंजीनियर्स और लोको पायलट को करीब 20-24 घंटे तक काम करना पड़ता है। रेलवे सेफ्टी स्टाफ की कमी का सीधा असर भारतीय रेल पर दिखाई देता है। इसके बाद भी सरकार इन हादसों में हताहतों की संख्या पहले के मुकाबले कम बताकर अपनी पीठ थपथपाती जा रही है। माना यह भी जा रहा है कि वित्त मंत्री आगामी बजट में राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष के तहत ज्यादा रकम रेल को दिए जाने का एलान कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्रालय और रेल मंत्रालय के बीच फंड बंटवारे को लेकर सहमति बन गई है। फंड का 50-50 फीसदी हिस्सा वित्त मंत्रालय और रेलवे देंगे।

पहले वित्त मंत्रालय सिर्फ 25 फीसदी फंड देने को राजी हुआ था। 75 फीसदी भार रेलवे को उठाने के लिए कहा गया था। रेलवे सेफ्टी फंड पर कुल 1.19 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे। रेलवे सेफ्टी फंड 5 साल के लिए बनाया जाएगा। पिछले साल ही रेलवे ने सेफ्टी फंड बनाने का प्रस्ताव भेजा था।


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