नासा बड़ा दावा, भारत में तेजी से घट रहा है पीने का पानी

नई दिल्ली (18 मई): अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के सेटेलाइट से बड़ा खुलासा हुआ है। नासा के अध्ययन से भारत में जल संकट को लेकर डरावनी तस्वीर सामने आई है। इसमें भारत को उन जगहों के बारे में बताया गया है जहां जल स्रोतों के अत्यधिक दोहन के कारण ताजे पानी की उपलब्धता तेजी घट रही है। इस तरह का यह पहला अध्ययन है जिसमें धरती की निगरानी करने वाले नासा के सेटेलाइट का उपयोग किया गया।नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के वैज्ञानिकों ने मानव गतिविधियों के डाटा से उन स्थानों का पता लगाया जहां ताजे पानी की उपलब्धता में बदलाव आ रहा है। इसकी वजह भी जानने का प्रयास किया गया। अध्ययन से यह भी जाहिर हुआ कि धरती के उन भू-भागों में पानी की उपलब्धता बढ़ रही है जहां कोई जल संकट नहीं है जबकि पानी की कमी वाले इलाके और सूख रहे हैं। इसके लिए मानव जल प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन समेत कई कारण हो सकते हैं।‘द गार्जियन’ अखबार में छपी इस रिपोर्ट के अनुसार उत्तरी और पूर्वी भारत के अलावा पश्चिम एशिया के देश, कैलिफोर्निया और ऑस्ट्रेलिया उन संवेदनशील स्थानों में हैं जहां जल स्रोतों का अत्यधिक दोहन ताजे पानी की उपलब्धता में गिरावट का प्रमुख कारण है। इसके चलते गंभीर समस्या खड़ी हो रही है। अध्ययन के अनुसार उत्तर भारत में गेहूं और धान जैसी फसलों की सिंचाई के लिए भूजल का दोहन पानी की उपलब्धता में हो रही तेज गिरावट का बड़ा कारण है। बारिश के बावजूद भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है।अध्ययन में नासा और जर्मन एयरोस्पेस सेंटर के संयुक्त मिशन ग्रेविटी रिकवरी एंड क्लाइमेट एक्सपेरिमेंट (ग्रेस) अंतरिक्ष यान के 14 साल के अभियान से मिले डाटा का उपयोग किया गया। इसके आधार पर दुनिया के 34 क्षेत्रों में ताजे पानी की प्रवृत्ति पर गौर किया गया।