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एनसीपी चीफ शरद पवार का दावा पीएम नरेंद्र मोदी ने दिया था साथ काम करने का प्रस्ताव

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) ने कहा है कि प्रधानमंत्री (PM) नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने बीजेपी-एनसीपी साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने उनके प्रस्ताव को ठुकरा दिया। शरद पवार (Sharad Pawar) ने एक टीवी साक्षात्कार में यह दावा किया।

NCP Sharad Pawar, शरद पवार

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (2 दिसंबर): राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) ने कहा है कि प्रधानमंत्री (PM) नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने बीजेपी-एनसीपी साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने उनके प्रस्ताव को ठुकरा दिया। शरद पवार (Sharad Pawar) ने सोमवार को एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में यह दावा किया। शरद पवार ने ऐसी खबरों को खारिज कर दिया कि प्रधानमंत्री (PM) नरेंद्र मोदी (Narendra Modi)  सरकार ने उन्हें देश का राष्ट्रपति (President) बनाने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने कहा, ‘लेकिन, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली कैबिनेट में सुप्रिया सुले को मंत्री बनाने का एक प्रस्ताव जरूर मिला था।’शरद पवार (Sharad Pawar) ने कहा, ‘नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने मुझे साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया था। मैंने उनसे कहा कि हमारे निजी संबंध बहुत अच्छे हैं और वे हमेशा रहेंगे, लेकिन मेरे लिए साथ मिलकर काम करना संभव नहीं है।’

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सुप्रिया सुले, शरद पवार की बेटी हैं और पुणे जिला में बारामती से लोकसभा सदस्य हैं। महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर चल रहे घटनाक्रम के बीच शरद पवार ने पिछले महीने नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। प्रधानमंत्री (PM) नरेंद्र मोदी (Narendra Modi)ने हमेशा से शरद पवार की तारीफ की है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के वक्त भी पीएम ने पवार के खिलाफ हमलावर रूख ना अपनाया जाए, इसका हमेशा ख्याल रखा। 2016 में पुणे के वसंतदादा सुगर इंस्टिट्यूट में पवार के निमंत्रण पर पहुंचे पीएम ने तारीफ करते हुए एनसीपी (NCP) चीफ को सार्वजनिक जीवन में एक उदाहरण बताया था। उस वक्त पीएम ने कहा था, 'शरद पवार के प्रति मेरे मन में श्रद्धा है। मैं उस वक्त गुजरात का मुख्यमंत्री था। उन्होंने मेरी ऊंगली पकड़कर चलने में मदद की है। सार्वजनिक तौर पर मुझे यह बताने में गर्व महसूस हो रहा है।'

शरद पवार ने यह भी कहा कि उद्धव की अगुवाई वाली सरकार में अजित को शपथ नहीं दिलाना एक 'सोचा-समझा फैसला' था। अजित ने इससे पहले अचानक से बीजेपी को सपोर्ट कर देवेंद्र फड़णवीस को मुख्यमंत्री बनवा दिया और खुद उपमुख्यमंत्री बन गए थे। हालांकि इसके तीन दिनों के बाद ही अजित ने इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद फड़णवीस को भी छोड़ना पड़ा। इसके बाद राज्य में शिवसेना ने एनसीपी (NCP) और कांग्रेस के सपोर्ट से सरकार बना ली।

Images Courtesy: Google

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