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धनतेरस से पहले दुल्हन की तरह सजे बाजार, देखकर खरीदें सोना-चांदी के सिक्के

धनतेरस को लेकर बाजार सज चूका है सोना ,चांदी से लेकर इलेक्ट्रोनिक बाजार तक सजे हुए है लेकिन सबसे ज्यादा लोगो की पसंद सोने और चांदी के सिक्के और खासकर चांदी के

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अमिताभ औझा, न्यूज 24 ब्यूरो, पटना(23 अक्टूबर): धनतेरस को लेकर बाजार सज चुका है। सोना, चांदी से लेकर इलेक्ट्रॉनिक बाजार तक सजे हुए है, लेकिन सबसे ज्यादा लोगों की पसंद सोने, चांदी के सिक्के और खासकर चांदी के बर्तन को लेकर है। लोग मान्यता है इस दिन चांदी के बर्तन या चांदी के सिक्के खरीदने काफी शुभ होता है, लेकिन यदि आप भी चांदी के बर्तन और सिक्के खरीदने जा रहे है तो सावधान हो जाए क्योंकि बाजार नकली चांदी के सिक्को और बर्तनों से भरे पड़े है। असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो गया है, पटना में असली और नकली चांदी के सिक्को की हकीकत को देखा न्यूज़ 24 संवाददाता ने।

पटना का बाकरगंज बाजार, यह पटना का सबसे पुराना सर्राफा बाजार है। सोने चांदी की सैकड़ो दुकाने है ,बड़ी बड़ी शो रूम से लेकर तंग गलियों तक में रोजाना करोड़ों का व्यापार होता है, लेकिन यहां असली और नकली का खेल भी खूब चलता है। यहां बाजार में नकली चांदी को जी एस यानि जर्मन सिल्वर कहते है उसका बहुत बड़ा कारोबार है। फिलहाल हमें जो जानकारी मिली थी बाकरगंज के इस मार्केट धनतेरस को लेकर जमकर नकली चांदी का कारोबार हो रहा है। बर्तन से लेकर लक्ष्मी गणेश और सिक्के तक न्यूज़ 24 संवाददाता भी यहां ग्राहक बनकर चांदी के सिक्के और चांदी के बर्तन लेने पहुंचा। दुकान सजी हुई थी, ऑर्डर पर ऑर्डर लिए जा रहे थे। हमने भी चांदी के सिक्के मांगे ,दो साइज के थे एक बड़े और एक छोटे बड़े सिक्के की कीमत सिर्फ 20 रुपये और छोटे सिक्के की कीमत पंद्रह रुपये है। 

हालंकि यह थोक का रेट है। अब दुकानदार इसे कितने में बेचेंगे यह उनपर निर्भर करता है, क्योंकि कोई इसे नकली कहकर नहीं बेचेगा सो इसकी कीमत कम से कम छह से सात सौ रुपये होगी। जर्मन सिल्वर की खासियत यह होती है की यह काफी दिनों तक काला नहीं होता है। सिक्के के अलावा यहां जर्मन सिल्वर के गणेश लक्ष्मी जी इसके बर्तन भी खूब बिक रहे है। बर्तन की कीमत अट्ठारह सौ रुपये से लेकर चार हजार रुपये किलो तक है। इन्हें इस बात की तनिक भी चिंता नहीं की ये गलत कर रहे है। छोटे व्यापारी थोक के थोक बर्तन और लाष्मी गणेश जी खरीद रहे है। 

इसके बाद हम पहुंचते है एक सर्राफा व्यवसाई के पास और उनसे जानते है की ये असली और नकली का क्या चक्कर है। दुकानदार ने बताया की ज्यादातर लोग जो सिक्के खरीदने वाले होते है वो असली सिक्के का मतलब विक्टोरिया ज़माने वालीसिक्को को मानते है जिनका वजन दस ग्राम होता था। हकीकत है की अब किसी भी बाजार में विक्टोरिया के सिक्के नहीं है। विक्टोरिया के सिक्के मतलब अंग्रेजो के ज़माने में चलने वाले चांदी के सिक्के अब विक्टोरिया ज़माने के सिक्को के नाम पर नकली सिक्के ढाले जा रहे है। ज्यादातर बड़े दुकानदार अब सिर्फ हौल मार्क वाले लक्ष्मी गणेश के सिक्के बेचते है। इस पर दुकान का हाल मार्क के अलवा भारतीय मानक ब्यूरो का भी हॉलमार्क होता है ..यही असली चांदी के सिक्के और बर्तन होते है।

चांदी के सिक्के के अलावा चांदी के बर्तन का भी बड़ा कारोबार है। इसमें भी जर्मन सिल्वर का बहुत कारोबार है असली चांदी की कीमत जहां 43 हजार किलोग्राम है वही जर्मन सिल्वर की कीमत वाली चांदी के बर्तनों की कीमत दो हजार से लेकर चार हजार रुपये प्रति किलो होती है। इसमें भी जल्दी इसमें भी जंग नहीं लगता इसलिए ग्राहकों को इसका पता भी देर से चलता है ।

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