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अब महाराष्ट्र में सिर्फ चलेगी मराठी

महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने मराठी कार्ड खेला है। सरकार ने अपने कामकाज से अंग्रेजी को बाहर कर मराठी भाषा को सभी कार्यालय में अनिवार्य

विनोद जगदाले, मुंबई (10 मई): महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने मराठी कार्ड खेला है। सरकार ने अपने कामकाज से अंग्रेजी को बाहर कर मराठी भाषा को सभी कार्यालय में अनिवार्य कर दिया है। सरकार ने इसके लिए सर्कुलर भी जारी कर दिया है, जिसके मुताबिक मराठी को अनिवार्य करने के साथ कई नए नियम बनाये गए है।

नियम ना मानने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी रखा गया है।फडणवीस सरकार के सर्कुलर में क्या है?- सरकारी योजनाओं की जानकारी अब लोगों को मराठी में देनी होगी साथ ही चर्चा भी मराठी में होगी।- टेलीफोन और मोबाइल फोन पर कामकाज के सिलसिले में बात करनी है तो वो मराठी में ही होगी।- अधिकारी फ़ाइल पर जो नोटिंग करेंगे वो अंग्रेजी में ना होकर मराठी में होगी।- सरकारी योजनाओं के नाम मराठी में ही होगा।- वरिष्ठ अधिकारी भाषण करते वक़्त और सरकारी बैठक में मराठी में ही बात करेंगे।- सरकार की तरफ से गठित समितियों की सिफारिशों को मराठी भाषा में देना होगा।जो अधिकारी और कर्मचारी सरकार के इस फैसले का पालन नहीं करेंगे, पहले उन्हें नोटिस दिया जायेगी, फिर भी अगर उन्होंने मराठी भाषा का इस्तेमाल नहीं किया तो उसकी तनख्वाह और प्रमोशन 1 साल के लिए रोक दिया जाएगा। सरकार के इस फैसले के बाद विवाद बढ़ सकता है। विपक्षी पार्टियां इसे बड़ा मुद्दा बना सकती है।ऐसे फैसले से कहा जा सकता है कि पिछले साढ़े तीन साल से महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ बीजेपी अब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना अध्यक्ष राज ठाकरे की राह पर चलती नज़र आ रही है।

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