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कलावा बांधते समय बरतें ये सावधानी, फायदे जानकर सोच में पड़ जाएंगे आप

अगर आप भी अपने हाथ में कलावा बांधते हैं तो ये खबर आपके लिए उपयोगी साबित हो सकती है। जी हां, कलावा तीन धागों से मिलकर बना हुआ होता है। आम तौर पर यह सूत से बना होता है। इसमें लाल, पीले, हरे या सफ़ेद रंग के धागे होते हैं।

kalawa

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (24 अक्टूबर): अगर आप भी अपने हाथ में कलावा बांधते हैं तो ये खबर आपके लिए उपयोगी साबित हो सकती है। जी हां, कलावा तीन धागों से मिलकर बना हुआ होता है। आम तौर पर यह सूत से बना होता है। इसमें लाल, पीले, हरे या सफ़ेद रंग के धागे होते हैं। यह तीन धागे त्रिशक्तियों (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) के प्रतीक माने जाते हैं। हिन्दू धर्म में इसको रक्षा के लिए धारण किया जाता है। मानते हैं कि जो कोई भी विधि विधान से रक्षा सूत्र या कलावा धारण करता है, उसकी हर प्रकार के अनिष्टों से रक्षा होती है।चलिए अब आपको बता देते हैं कि कलावा आपके लिए कितना महत्वपूर्ण है।कलावा आम तौर पर कलाई में धारण किया जाता है। अतः यह तीनों धातुओं (कफ,वात,पित्त) को संतुलित करती हैं। बता दें कि इसको कुछ विशेष  मंत्रों के साथ बांधा जाता है। अतः यह धारण करने वाले की रक्षा भी करता है। अलग-अलग तरह की समस्याओं के निवारण के लिए अलग-अलग तरह के कलावे बांधे जाते हैं।हर तरह के कलावे के लिए अलग तरह का मंत्र होता है। कलावा धारण करने या बांधने की सावधानियां क्या हैं? कलावा सूत का बना हुआ ही होना चाहिए। इसे मन्त्रों के साथ ही बांधना चाहिए। इसे किसी भी दिन पूजा के बाद धारण कर सकते हैं। लाल, पीला और सफ़ेद रंग का बना हुआ कलावा सर्वोत्तम होता है। एक बार बांधा हुआ कलावा एक सप्ताह में बदल देना चाहिए। पुराने कलावे को वृक्ष के नीच रख देना चाहिए या मिटटी में दबा देना चाहिए।


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