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डे-नाइट टेस्ट से पहले गुलाबी हुई कोलकाता सिटी

22 नवंबर को भारत और बांग्लादेश के बीच डे-नाइट टेस्ट खेला जाना है। इसके लिए तैयारी जोरो पर है। बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने इसका पस्ताव रखा। इस टेस्ट मैच को लेकर दर्शकों में काफी उत्साह हैं। मैच की सारे टिकट बिक चुकी हैं।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (20 नवंबर): 22 नवंबर को भारत और बांग्लादेश के बीच डे-नाइट टेस्ट खेला जाना है। इसके लिए तैयारी जोरो पर है। बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने इसका पस्ताव रखा। इस टेस्ट मैच को लेकर दर्शकों में काफी उत्साह हैं। मैच की सारे टिकट बिक चुकी हैं। मैच से पहले पुरा ईडेन गार्डेन का मैदान पिंक लाइट में रंग गई है। 

स्टेडियम के अंदर बाहर काफी पेंटिंग बनाए गए हैं। विराट कोहली की टीम इस सीरीज में पहला टेस्ट पारी और 130 रन से जीत कर उत्साह में है और इस ऐतिहासिक मैच को भी जितने के इरादे से उतरेगी। हालांकि दोनों ही टीमों के लिए पिंक बॉल सबसे बड़ी चुनौती है। मैदान को लेकर भी काफी सवाल उठाये जा रहे हैं और दोनों टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती शाम को होने वाली ड्यू की रहेगी, जो खेल को काफी प्रभावित करेगी।

कई विशेषज्ञों का मानना है कि गांगुली ने गुलाबी गेंद के टेस्ट के लिए सबसे उपयुक्त जगह का चयन किया है क्योंकि ईडन गार्डन्स में इसे सफल बनाने के लिए सभी चीजें मौजूद हैं। पिंक बॉल अब भी ज्यादा नहीं बनाई जाती हैं, कम से कम भारत में तो फिलहाल इस बॉल का प्रचलन नहीं है। इसलिए अब भी कई बातों को लेकर चिंता हैं। डे-नाइट मैच दलीप ट्रोफी के दौरान तीनों सेशन में कूकाबूरा गेंदों के साथ खेले गए थे लेकिन आगामी टेस्ट मैच के लिए एसजी गेंदों का उपयोग किया जाएगा।

गुलाबी गेंद के साथ मुख्य समस्या इसकी उम्र रही है। पारंपरिक लाल गेंद को लेदर से ज्यादा रंग मिलता है, तो वहीं पिंक बॉल मुख्य रूप से एक रंगीन उत्पाद है। जितना अधिक इसका उपयोग किया जाता है, संभावना है कि यह अपना मूल रंग खो देती है। लाल गेंद के मैट फिनिश के बजाय, गुलाबी रंग में बाहरी चमक होती है और ऐसे में घास एक अहम भूमिका निभाती है। ईडन पिच में पहले से ही एक अच्छा ग्रास कवर (घास) है लेकिन यहां हरा आउटफील्ड है जो गेंद को लंबे समय तक चलने में मदद करेगा। 

क्यूरेटर मुखर्जी और उनकी टीम के सदस्यों के लिए बड़ी मुश्किल सही जल संतुलन बनाए रखना है। पिछले कुछ दिनों से पानी नहीं डालने से तेज धूप ने ऊपरी सतह को सूखा बना दिया है लेकिन देश के इस हिस्से में मानसून के लंबे समय तक रहने और बुलबुल के प्रभाव के कारण सतह के नीचे पानी रह सकता है जो मैदान पर कुछ असमान उछाल पैदा कर सकता है।

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