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...तो इसलिए जन्माष्टमी पर पालने में झुलाए जाते हैं भगवान श्री कृष्ण

कृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी केवल देश में ही नहीं विदेशों में भी मनाया जाता है। जन्माष्टमी पर व्रत रखने वाले भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने के दौरान कुछ खास विधि जरूर करते हैं। इन्हीं में से एक है भगवान कृष्ण को पालने पर झुलाना

Krishna Jhula

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 अगस्त): श्री कृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी केवल देश में ही नहीं विदेशों में भी मनाया जाता है। जन्माष्टमी पर व्रत रखने वाले भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने के दौरान कुछ खास विधि जरूर करते हैं। इन्हीं में से एक है भगवान कृष्ण को पालने पर झुलाना। लोगों के दिमाग में अक्सर सवाल उठता है कि आखिर जन्माष्टमी पर पूजा के दौरान पालने पर भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या तस्वीर को क्यों झुलाया जाता है?

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दरअसल, कृष्णाश्रयी शाखा से जुड़े भक्त इस सवाल का उत्तर कई पहलूओं से समझाते हैं। उन्हीं में से एक यह है कि जन्माष्टमी को व्रतराज कहा जाता है। यानी सभी व्रतों में प्रमुख  वे कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण ने बालकाल में ज्यादातर कलाएं पालने में लेटे-लेटे ही दिखाया था। इसी वजह से जन्माष्टमी की पूजा में कोशिश की जाती है कि पालने का इंतजाम जरूर हो।

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दूसरा पहलू यह है कि मां यशोदा भगवान श्रीकृष्ण को अक्सर पालने में रखती थीं, जिसके चलते उन्हें पालना बेहद पसंद है। मान्यता है कि जन्माष्टमी की पूजा के दौरान अगर व्रत रखने वाले पालने में नंद गोपाल को झुला दें, तो उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

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मथुरा और आसपास के इलाकों में कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण को पालने में झुलाने पर संतान से स्नेह बढ़ता है। इसके पीछे तर्क दिया जाता है कि मां यशोदा जब कभी अपने कान्हा को पालने में लेटे हुए देखती थीं तो वह काफी आनंद महसूस करती थीं। मान्यता है कि नंदगोपाल को पालने में झुलाने के दौरान जो ठीक वैसी ही अनुभूति होती है, जिसका सकारात्मक असर मां-पुत्र-पुत्री के प्रेम में भी झलकता है।

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आपको बता दें कि जन्माष्टमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच यह दुविधा है कि वह 23 तारीख को व्रत रखें या फिर 24 अगस्त को। दरअसल भाद्रपद के कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में रात 12 बजे भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इसलिए हर साल इसी मुहूर्त में कान्हा का जन्मदिवस मनाया जाता है। लेकिन हर साल अष्टमी दो दिन होती है। जैसे इस बार अष्टमी तिथि 23 अगस्त की रात्रि को शुरू होकर 24 तारीख को समाप्त हो रही है। यानी जन्माष्टमी में इस बार 23 और 24 अगस्त को दो दिन मनाई जाएगी। जन्माष्टमी का पर्व हिन्दु पंचाग के अनुसार, भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस बार यह अष्टमी 23 और 24 तारीख दो दिन है। विशेष उपासक 23 को जन्माष्टमी मनाएंगे जबिक आम लोग 24 अगस्त को जन्माष्टमी मना सकते हैं। क्योंकि उदया तिथि अष्टमी की बात करें तो यह 24 अगस्त को है। हालांकि भगवान कृष्ण के जन्म के वक्त आधी रात को अष्टमी तिथि को देखें तो 23 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी।

(Image Credit: Google)


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