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श्री कृष्ण के 5 प्रसिद्ध मंदिर जहां भक्तों पर बरसती है कन्हैया की कृपा

हमारे देश में बहुत से कृष्ण मंदिर हैं, जिनका अलग-अलग महत्व और मान्यताएं हैं लेकिन इनमें कुछ खास मंदिर ऐसे हैं, जिनसे लोगों का विशेष जुड़ाव है। इन मंदिरों में देश और विदेश से हर साल लाखों श्रद्धालु आकर भगवान कृष्ण की भक्ति में अपना समय बिताते हैं

Shri-Krishna-Janmashtami

गगन चौधरी, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 अगस्त): हमारे देश में बहुत से कृष्ण मंदिर हैं, जिनका अलग-अलग महत्व और मान्यताएं हैं लेकिन इनमें कुछ खास मंदिर ऐसे हैं, जिनसे लोगों का विशेष जुड़ाव है। इन मंदिरों में देश और विदेश से हर साल लाखों श्रद्धालु आकर भगवान कृष्ण की भक्ति में अपना समय बिताते हैं। जन्माष्टमी भी आने वाली है तो चलिए ऐसे में हैं उन 5 प्रसिद्ध कृष्ण मंदिर के बारे में जानते हैं, जहां बरसती है भगवान कृष्ण की महाकृपा...

jagannath mandir puri जगन्नाथ मंदिर...

ओडिशा के पुरी में स्थित है जगन्नाथ मंदिर। इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ के साथ-साथ उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा की भी मूर्ति है। शास्त्रों और पुराणों में जगन्नाथ पुरी को धरती का बैकुंठ भी कहा गया है। ऐसी मान्यता है कि अगर कोई व्यक्ति यहां तीन दिन और तीन रात ठहर जाए तो उसे जीवन-मरण के चक्कर से मुक्ति मिल जाता है। ये मंदिर लगभग 800 साल से भी ज्यादा पुराना है। ये मंदिर चार धामों में से एक है। जगन्नाथ मंदिर की खासियत ये भी है कि इसकी चोटी पर लगा झंडा हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है। इसी मंदिर के शिखर पर एक सुदर्शन चक्र भी स्थित है। इस चक्र को किसी भी दिशा से खड़े होकर देखने पर ऐसा लगता है कि चक्र का मुंह आपकी तरफ है।  खास बात ये भी है कि इस मंदिर की गुंबद के आस-पास ना तो कोई पक्षी उड़ता दिखाई देता है और ना ही गुंबद की परछाई दिन के किसी भी समय दिखाई देती है।

udupi krishna mandirउडुपी श्री कृष्ण मंदिर...

यह मंदिर कर्नाटक के उडुपी शहर में स्थित है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर को 13वीं सदी में बनाया गया था। इस पवित्र जगह को दक्षिणी भारत का मथुरा भी कहा जाता है। इस स्थान को उडुपी श्री कृष्ण मठ के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर में एक आश्रम भी है जिसे भगवान कृष्ण की भक्ति के लिए बहुत पवित्र माना गया है। इस मठ के आस-पास कई मंदिर हैं, सबसे प्राचीन मंदिर लगभग 1500 साल पुरानी लकड़ी और पत्थर से बना हुआ है। यहां स्थित तालाब में मंदिर का भव्य और खूबसूरत प्रतिबिंब दिखाई देता है। एक बात है जो इस मंदिर को खास बनाती है और वो है, यहां की पूजा-पद्धति। यहां कृष्ण पूजा चांदी की बनी खिड़की से की जाती है, जिसमें नौ छेद होते हैं, जिन्हें "नवग्रह किटिकी" कहा जाता है।  इस मंदिर में कृष्णाष्टमी, रामनवमी, दीपावली, हनुमान जयंती, नरसिंह जयंती, वसंतोत्सव, सप्तोत्सव आदि त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाए जाते हैं।

dwarkadhishद्वारिकाधीश मंदिर...

उत्तर प्रदेश के मथुरा में यमुना नदी के किनारे स्थित है द्वारिकाधीश मंदिर।  इस मंदिर का निर्माण 1814 में सेठ गोकुल दास पारीख ने कराया था, जो ग्वालियर रियासत के कोषाध्यक्ष थे। द्वारिकाधीश मंदिर की सुंदरता देखते ही बनती है। इस मंदिर में राधा-कृष्ण के अलावा और दूसरे देवी-देवताओं की भी भव्य और अद्भुत मूर्तियां विराजमान हैं। जो भी व्यक्ति इस मंदिर में जाकर भगवान के दर्शन करता है उसकी नजर मूर्तियों से नहीं हटती। विशेषकर होली और जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर इस मंदिर में श्रद्धालु और पर्यटकों की भीड़ बढ़ जाती है। द्वारिकाधीश मंदिर ''झूले के त्योहार'' के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है, जो हर साल सावन के महीने में आयोजित किया जाता है।

shri nath mandirश्रीनाथ जी मंदिर...

राजस्थान में उदयपुर के पास राजसमंद जिले के नाथद्वारा में स्थित है श्रीनाथजी मंदिर। ऐसा माना जाता है कि भगवान श्री कृष्ण को समर्पित ये मंदिर 12वीं शताब्दी में बनाया गया था। इस भव्य मंदिर को ''श्रीनाथजी की हवेली'' भी कहा जाता है। मंदिर में विराजमान श्रीनाथजी, भगवान श्रीकृष्ण के ७ साल की अवस्था के रूप हैं। ये मंदिर अपनी मूर्तियों के लिए भी जाना जाता है। इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण की काले रंग की संगमरमर की मूर्ति विराजमान है। भगवान की इस भव्य मूर्ति को सिर्फ एक ही पत्थर से बनाया गया है। मंदिर में रोज श्रीनाथ जी का शृंगार किया जाता है और उनके वस्त्र बदले जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि मेवाड़ के राजा इस मंदिर में मौजूद मूर्तियों को गोवर्धन की पहाड़ियों से औरंगजेब से बचाकर लाए थे।  आज भी यहां जन्माष्टमी पर आधी रात को 21 तोपों की सलामी देकर भगवान का स्वागत किया जाता है।

shri ranchhodrai mandirश्री रंछोद्रीजी महाराज मंदिर...

गुजरात में गोमती नदी के किनारे डाकोर में स्थित है श्री रंछोद्रीजी महाराज मंदिर। यह मंदिर भगवान कृष्ण के प्रमुख मंदिरों में से विशेष स्थान रखता है। इस मंदिर को 1772 में मराठा नोबेल द्वारा बनवाया गया था। सोने की 8 गुबंदों और 24 बुर्ज से मिलकर इस अद्भुत और भव्य कृष्ण मंदिर का निर्माण हुआ है। जन्माष्टमी पर यहां कृष्ण भक्तों का जमावड़ा लगता है और विशेष विधि से भगवान कृष्ण की पूजा-अर्चना की जाती है। इस मंदिर के पास मां लक्ष्मी का भी एक मंदिर स्थित है। ऐसा माना जाता है कि हर शुक्रवार भगवान कृष्ण, मां लक्ष्मी के मंदिर में उनसे मिलने आते हैं।

(Image Credit: Google)


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