प्रोटेम स्पीकर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे JDS के 5 विधायक

नई दिल्ली (18 मई): कर्नाटक में पिछले कई दिनों से नई सरकार के गठन के लिए सियासी ड्रामा थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब प्रोटेम स्पीकर केजी बोपैया की नियुक्ति का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। जेडीएस के 5 विधायकों ने केजी बोपैया की प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्यपाल वजूभाई वाला ने बीजेपी MLA केजी बोपैया को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया है।

आपको बता दें कि जेडीएस के साथ-साथ कांग्रेस भी बोपैया को प्रोटेम स्पीकर बनाने का विरोध कर रही है।कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी का कहना है कि बीजेपी ने किया है, वह नियमों के खिलाफ है। आदर्श तौर पर सबसे सीनियर सदस्य को इस पद के लिए चुना जाता है। वहीं बीजेपी नेता प्रकाश जावडेकर ने कहा कि केजी बोपैया को 2008 में भी उस समय के गवर्नर ने प्रोटेम स्पीकर बनाया गया था। बोपैया की उम्र उस समय आज से भी 10 साल कम थी। कांग्रेस की अपत्ति निराधार है। बोपैया की नियुक्ति पूरी तरह से नियमों के मुताबिक हुई है।प्रोटेम स्‍पीकर अस्थाई विधानसभा अध्यक्ष होता है। इसकी नियुक्ति गवर्नर करता है और इसकी नियुक्ति आमतौर पर तब तक के लिए होती है जब तक विधानसभा अपना स्‍थायी विधानभा अध्‍यक्ष नहीं चुन लेती। प्रोटेम स्पीकर ही नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ ग्रहण कराएंगे और इसके बाद शक्ति परीक्षण होगा। सुप्रीम कोर्ट ने विडियोग्राफी करवाने की कांग्रेस की अपील पर फैसला नहीं दिया और यह निर्णय भी प्रोटेम स्पीकर के विवेक पर छोड़ दिया।कर्नाटक विधानसभा चुनाव की 222 सीटों पर आए नतीजों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी है। बीजेपी को 104 सीटें मिली हैं, लेकिन यह बहुमत से दूर है। बहुमत के लिए 112 विधायक जरूरी हैं और संख्या बल के लिहाज से बीजेपी के 8 विधायक कम हैं। कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 37, बसपा को 1 और अन्य को 2 सीटें मिली हैं। शनिवार को शक्ति परीक्षण के बाद ही पता चल सकेगा कि येदियुरप्पा की सरकार रहती है या नहीं।