कर्नाटक में किंग बनने की राह पर जेडीएस, जानें पूरा इतिहास

बेंगलुरू (15 मई): कर्नाटक में जनता ने त्रिशंकू विधानसभा का जनादेश दिया है। सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद बीजेपी को राज्य की सत्ता आसानी से मिलती नहीं दिख रही है। वहीं कांग्रेस के समर्थन से सबसे कम सीट होने के बावजूद जनता दल सेक्युलर यानी जेडीएस की राज्य में सरकार बनाने की कवायद में जुटी है। सोनिया गांधी ने जेडीएस अध्यक्ष देवगौड़ा साथ बातकर राज्य में उनको बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान किया है। कांग्रेस के समर्थन के ऐलान के बाद देवगौड़ा के बेटे और राज्य पार्टी अध्यक्ष एचडी स्वामी मुख्यमंत्री के रेस में आगें हैं और वो सरकार बनाने का दावा पेश करने लिए राज्यपाल से मिलने वाले हैं।गौरतलब है कि देवगौड़ा जेडीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। लेकिन उनके बेटे एचडी कुमारस्वामी भी पार्टी में प्रमुख स्थान रखते हैं और कर्नाटक जेडीएस के अध्यक्ष हैं। जेडीएस की स्थापना एचडी देवगौड़ा ने 1999 में जनता दल से अलग होकर की थी। जनता दल की जड़ें 1977 में कांग्रेस के खिलाफ बनी जनता पार्टी से शुरू हुई थी। शुरू में कर्नाटक में जनता दल की कमान देवगौड़ा के हाथों में थी। उन्हीं के नेतृत्व में जनता दल ने 1994 में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई और देवगौड़ा मुख्यमंत्री बने। 1996 में जनता दल के नेता के रूप में कांग्रेस के समर्थन से एचडी देवगौड़ा 10 महीने तक देश के प्रधानमंत्री भी रहे।वहीं, देवगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी राज्य में बीजेपी के समर्थन से भी सरकार चला चुके हैं। 2004 के चुनाव के बाद कांग्रेस और जेडीएस ने मिलकर सरकार बनाई थी और कांग्रेस के धरम सिंह सीएम बने। लेकिन 2006 में जेडीएस गठबंधन सरकार से अलग हो गई। फिर बीजेपी के साथ बारी-बारी से सत्ता संभालने के समझौते के तहत कुमारस्वामी जनवरी 2006 में सीएम बने। अगले साल सत्ता बीजेपी को सौंपने की जगह कुमारस्वामी ने अक्टूबर 2007 में राज्यपाल को इस्तीफा भेज दिया, जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा.बाद में जेडीएस ने बीजेपी को समर्थन का ऐलान किया। इस समझौते के तहत 12 नवंबर 2007 को बी. एस. येदियुरप्पा 7 दिन के लिए सीएम बने थे।