अमेरिका ने भारत को दिया 'नाटो देश' जैसा दर्जा, पाकिस्तान के सीने पर लोटा सांप!

राजीव शर्मा, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (2 जुलाई): दुनिया की दूसरी महाशक्ति अमेरिका ने भी भारत को नाटो देशों के बारबर दर्जा दे दिया है। रूस के साथ भारत के पहले से ही रक्षा संबंध प्रगाढ़ और प्राथमिक हैं। कई रक्षा और न्यूक्लियर परियोजनाएं रूस और भारत परस्पर सहयोग के आधार पर कर रहे हैं। एशिया पेसेफिक देशों के साथ कोई भी संबंध रूस भारतीय हितों को ध्यान में रख कर ही बनाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्लू बुश के जमाने से भारत को तरजीह दिये जाने का जो सिलसिला शुरू हुआ है वो डोनल्ड ट्रंप तक जारी है। ध्यान रहे ट्रंप प्रशासन ने भारत को रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम न खरीदने की चेतावनी दी थी। जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले ट्रंप ने अपने विदेश मंत्री माइक पोम्पियो को भारत भेजकर इस डील को खत्म करने का दबाव बनाने की कोशिश की थी। भारत ने पोम्पियो को दो टूक कहा था कि इस बारे में भारतीय हितों को सर्वोपरि रखेंगे।ट्रंप के शासनकाल में भारत को यह स्थान दिये जाने से साबित हो गया है कि अमेरिकी राजनीति और कूटनीति में भारत की स्थिति बेहद मजबूत है। भारत को नाटो देशों के बराबर दर्जा दिये जाने का प्रस्ताव पारित होते ही सबसे ज्यादा चिंता पाकिस्तान को हुई है। चीन भी अमेरिका के इस कदम से चिंतित है लेकिन अभी चीन की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी है। ऐसा माना जा रहा है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खांन जुलाई में संभावित अमेरिका यात्रा के दौरान भारत को नाटो देशों के समकक्ष दर्जा दिये जाने का विरोध कर सकते हैं।

बहरहाल, अमेरिकी संसद ने भारत को नाटो देशों के समान दर्जा देने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब रक्षा संबंधों के मामले में अमेरिका भारत के साथ नाटो के अपने सहयोगी देशों, इजरायल और साउथ कोरिया की तर्ज पर ही डील करेगा। वित्त वर्ष 2020 के लिए नैशनल डिफेंस ऑथराइजेशन ऐक्ट को अमेरिकी सेनेट ने पिछले सप्ताह मंजूरी दी थी। अब इस विधेयक में संशोधन के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई है। सेनेटर जॉन कॉर्निन और मार्क वॉर्नर की ओर से पेश किए गए विधेयक में कहा गया था कि हिंद महासागर में भारत के साथ मानवीय सहयोग, आतंक के खिलाफ संघर्ष, काउंटर-पाइरेसी और मैरीटाइम सिक्यॉरिटी पर काम करने की जरूरत है।अमेरिका ने भारत को 2016 में बड़ा रक्षा साझीदार माना था। इस दर्जे का अर्थ है कि भारत उससे अधिक अडवांस और महत्वपूर्ण तकनीक वाले हथियारों की खरीद कर सकता है। अमेरिका के करीबी देशों की तरह ही भारत उससे हथियारों और तकनीक की खरीद कर सकता है।Images Courtesy:Google