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आरे मेट्रो कार शेड के लिए 2600 पेड़ों की कटाई के विरोध का असर, एमएमआरडीए ने लगाए पेड़

मुंबई आरे के जंगल में मेट्रो -3 कार शेड के लिए पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरण प्रेमियों के विरोध और अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा और पेड़ों की कटाई पर रोक को देखते हुए, मुंबई और

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इंद्रजीत सिंह, न्यूज 24 ब्यूरो, मुंबई(22 अक्टूबर): मुंबई आरे के जंगल में मेट्रो -3 कार शेड के लिए पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरण प्रेमियों के विरोध और अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा पेड़ों की कटाई पर रोक को देखते हुए मुंबई और उसके आसपास इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने वाली संस्था एमएमआरडीए ने 51151 पेड़ लगाए हैं। हालांकि एमएमआरडीए कमिश्नर का कहना है कि पर्यावरण को ध्यान में रखकर हम  एक नया जंगल विकसित कर रहे हैं और विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ साथ चलना चाहिए। मुंबई से क़रीब 20 किलोमीटर दूर ठाणे के शीलफाटा में एमएमआरडीए , वन विभाग के सहयोग से एक घना जंगल बना रहा है इसके लिए यहां 36 हेक्टेयर क्षेत्र में 41151 पेड़ लगाया जा रहा है जबकि कल्याण के टिटवाला में 10 हेक्टेयर क्षेत्र में 10000 पेड़ लगाए जा रहे हैं। 

सबसे बड़ा सवाल है कि अब तक सिर्फ इमारतों और इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करने वाली संस्था पेड़ क्यों लगाने लगी, दरसल किसी भी विकास कार्य के लिए कुछ पेड़ जरूर काटने पड़ते हैं और एसे में जब मुंबई में  मेट्रो का जाल बनना है मेट्रो भवन बनना है तो कुछ पेड़ काटने पड़ सकते हैं। जिस तरह से आरे मेट्रो कारशेड का विरोध हुआ ,भविष्य में इस तरह का विरोध और न हो साथ मामला अगर कोर्ट में जाये तो एमएमआरडीए कोर्ट को बता सके कि हमने एक पेड़ काटने के बदले कम से कम 10 पेड़ लगाए हैं।

सभी पेड़ दो साल के लगाए जा रहे हैं और लगाने वाले को तीन साल के देखरेख सहित एक पेड़ का 1228 रुपये दिया गया है एमएमआरडीए का मानना है कि 5 साल में पेड़ काफ़ी बड़ा हो जाता है और उसकी देखरेख की जरूरत नहीं होती संस्था का टारगेट है कि 5 साल में विकास कार्य के लिए जितने पेड़ विस्थापित हो कम से कम उसका 10 गुना पेड़ लगे , जो पेड़ लगाए जा रहे हैं उनमें, 1450 बकाम नीम, 7005 जामुन, 5475 शीशम, बरगद पीपल सहित दर्जनों जंगली पेड़ भी हैं।

हालांकि एमएमआरडीए कमिश्नर का कहना है कि उनका पेड़ लगाने का प्लान काफी पहले बना लेकिन एक कारण ये भी है कि अब सुप्रीम कोर्ट ने आरे में मेट्रो कारशेड को लेकर और पेड़ काटने पर रोक लगा दी है साथ ही प्रशासन से पूछा है कि जो पेड़ लगाए वो कितने बड़े हैं और जितने पेड़ लगाए उसमें से कितने बचे। 

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