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'बलिदान बैज' वाले ग्लब्ज पर धोनी को मिला BCCI साथ, ICC को दिया ये जवाब

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी के सेना के 'बलिदान बैज' वाले ग्लब्ज पर BCCI का साथ मिला है। BCCI की प्रशासनिक समिति के अध्यक्ष विनोद राय के मुताबिक इस मुद्दे पर आईसीसी को जवाब दे दिया गया है

 न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (7 जून): टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी के सेना के 'बलिदान बैज' वाले ग्लब्ज पर BCCI का साथ मिला है। BCCI की प्रशासनिक समिति के अध्यक्ष विनोद राय के मुताबिक इस मुद्दे पर आईसीसी को जवाब दे दिया गया है। उन्होंने कहा कि 'हम अपने खिलाड़ियों के साथ खड़े हैं। धोनी के दस्ताने पर जो चिह्न है, वह किसी धर्म का प्रतीक नहीं है और न ही यह कमर्शल है। जहां तक पहले से परमिशन लेने की बात है तो हम इसके लिए आईसीसी से धोनी को दस्तानों के इस्तेमाल को लेकर अपील करेंगे।' विनोद राय ने ये बातें  बीसीसीआई की बैठक से पहले कही। इस मीटिंग में विनोद राय के अलावा बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी समेत कई बड़े अधिकारी मौजूद हैं।

राजीव शुक्ला ने कहा, 'धोनी ने कुछ भी गलत नहीं किया है। आईसीसी केवल कमर्शियल एनोडोर्समेंट के लिए शासन करता है। बीसीसीआई ने इस पर आईसीसी को पत्र लिखकर अच्छा किया है। आईसीसी के किसी नियम ने इसका उल्लंघन नहीं किया।'

टीम इंडिया के दिग्गज विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी के दस्तानों पर भारतीय सेना के बलिदान बैज को लेकर आईसीसी की आपत्ति पर बहस तेज हो गई है। विश्व कप में टीम इंडिया के पहले मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ धोनी ने जो दस्ताने पहने थे, उन पर सेना का बलिदान बैज बना हुआ था। इस पर आईसीसी ने बीसीसीआई से अपील की है कि वह धोनी को दस्तानों से लोगो हटाने को कहे। आईसीसी का कहना है कि नियमों के मुताबिक किसी भी अन्य प्रतीक वाली चीजों को मैदान पर नहीं पहना जा सकता।

यही नहीं इस मुद्दे पर देश की खेल हस्तियों ने धोनी का समर्थन किया है। पहलवान योगेश्वर दत्त ने कहा कि हमें धोनी पर गर्व है और उन्हें सेना के बलिदान बैज वाले दस्तानों को पहनना जारी रखना चाहिए। उनके अलावा पहलवान सुशील कुमार ने भी समर्थन किया है। पूर्व हॉकी खिलाड़ी सरदार सिंह, सुशील कुमार और ओलिंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त ने धोनी के समर्थन में हैं। भारतीय खिलाड़ियों का कहना है कि बलिदान बैज पहनना सम्मान की बात है और आईसीसी को इस तरह की सख्ती नहीं दिखानी चाहिए।


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