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कोटा में बाढ़ का कहर, लोगों के लिए देवदूत साबित हो रहे मछुआरे

मध्य प्रदेश के कई इलाकों में हो रही लगातार बारिश के कारण चंबल बैराग से छोड़े गए पानी के चलते राजस्थान का कीट शहर बाढ़ की चपेट में है।

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केजे श्रीवत्सन, न्यूज़ 24 ब्यूरो, कोटा(16 सितंबर): मध्य प्रदेश के कई इलाकों में हो रही लगातार बारिश के कारण चंबल बैराग से छोड़े गए पानी के चलते राजस्थान का कीट शहर बाढ़ की चपेट में है। यहां के कई मोहल्लों में अब 10 से 12 फिट पानी भर गया है। राज्य के सीएम अशोक गहलोत ने भी बाधित क्षेत्रो का हवाई दौरा कर जायजा लिया है। कोटा के नयापुरा, बापूनगर, नंदा की बावरी, खेड़ली फाटक जैसे कई इलाके पिछले 48 घंटों से पानी मे डूबे  हुए  है। यहां ना बिजली है ना ही साफ पानी है, घरों में पानी का जलस्तर भी लगातार चम्बल नदी से छोड़े जा रहे पानी के कारण बढ़ ही रह है। शहर के कई इलाकों में बाढ़ आ गई है तो वहीं कई अन्य इलाकों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। चंबल नदी के किनारे के इलाके पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं। 

घरों के दरवाजे तक पानी में डूब चुके हैं. मजूबरन लोगों को अपने घरों की छतों पर रात गुजारनी पड़ी, जिसकी वजह से SDRF और नगर निगम की टीम मिलकर संयुक्त रुप से राहत और बचाव कार्य में जुटी है। चौकाने वाली बात तो यह है कि इतना सब कुछ होने के बावजूद लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित जगह पर जाने को तैयार नहीं ही। इनका आरोप है कि कुछ लोग हालात का फायदा उठाकर घरो में चोरियां भी कर रहे हैं। इस बीच राजस्थान के कोटा में डैम के सभी 19 गेट खोले दिए गए, जिसके चलते रिहायशी इलाका सैलाब में डूबा नज़र आ रहा है। 

चंबल नदी के करीब बनी कॉलोनियों में जबरदस्त जलभराव है। आलम यह है कि यहां नदी-नाले उफान पर हैं, क्योकि राज्य के 5 बड़े बांध कोटा बैराज, राणाप्रताप सागर, जवाहर सागर और माही बजाज के सभी गेट खोलने पड़े हैं। जयपुर सहित 3 बड़े जिलो की प्यास बुझाने वाले बीसलपुर बांध के भी 18 में से पहली बार 17 गेट खोले गए। कोटा, बारां, बूंदी, चित्तौड़गढ, झालावाड़ में बाढ़ के हालात के चलते बारां, झालावाड़ में सोमवार को स्कूल बंद रखा गया है।

कोटा में पानी चंबल नदी से करीब 100 फीट ऊपर बने मकानों की तरफ बढ़ रहा है। चित्तौड़गढ़ का बेगूं कस्बा टापू बना है। कस्बे के सभी मार्ग बंद हो गए हैं।बेगूं में इस सीजन में 1747 मिमी बारिश हो चुकी है। इतनी बारिश गत 50 साल में भी नहीं हुई। चित्तौड़गढ़ के मऊपुरा आदर्श विद्या मंदिर स्कूल के 350 बच्चे और 50 शिक्षक-स्टाफ शनिवार से फंसे हुए हैं। बूंदी के बसोली में गुढ़ा बांध के रविवार को 4 गेट 6 फीट तक खोले गए। 12 गांवों में हाईअलर्ट है। झालावाड़ के चौमहला, गंगधार, रायपुर क्षेत्र में घरों में पानी भरा।

 सेना के 70 जवानों ने चौमहला क्षेत्र में मोर्चा संभाला। इसी तरह बारां में पार्वती, कालीसिंध और परवन नदी के उफान पर रहने से कई कस्बों से संपर्क कटा। बाढ़ के हालातों के चलते मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने 2 मंत्रियों के साथ सोमवार को हवाई दौरा किया। यहां तक कि बाढ़ प्रभावित बूंदी, कोटा, झालावाड़ और धौलपुर जिलों के कर्मचारियों के अवकाश निरस्त किए गए हैं। गहलोत ने मध्यप्रदेश के सीएम कमलनाथ से भी बात की और आशा जताई कि दोनों राज्य बचाव कार्यों में कमी नहीं आने देंगे।कोटा में आई बाढ़ के कारण चारों ओर तबाही का मंजर नजर आ रहा है लेकिन कई हाथ भी सहायता के लिए आगे बढ़े हैं News24 ने जब बाढ़ प्रभावित इलाकों मैं जाकर लोगों की पीड़ा को जानना चाही तो पता लगा कि प्रशासन जहां अब तक भी नहीं पहुंचा वहां स्थानीय मछुआरे और युवक मिलकर लोगों को ना केवल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे थे, बल्कि जिनके घर पानी में डूबे हुए थे उन्हें खाना और पीने का साफ पानी देने में जुटे थे।

कोटा में बाढ़ के इन सुपर हीरो की कहानी

अनवर खान और आंसू पेशे से मछुआरे चम्बल नदी में ही ऊनी लड़की की छोटी सी नाव में बैठकर मछली पकड़कर परिवार का गुजारा करते हैं। दो दिन जब चंबल ने अपना उग्र रूप दिखाते हुए कोटा में बाढ़ के हालात बन दिए तो इनका घर भी पानी कर तेज बहाव में डूब गया, लेकिन उसका मातम मानकर बैठ जाने की बजाय इन्होने अपने आस पास के लोगों को बचाने की ठानी। नाव से उन मोहल्लों में गए जहां 10 से 15 फीट पानी था। लोगों को प्रशासन की सहायता नहीं पहुंच पाई थी उनके सामानों के साथ सुरक्षित बाढ़ की चपेट से बाहर निकाल कर उन्होंने सुरक्षित पहुंचाया है। कुछ लोग घर छोड़ने को किसी भी सूरत में तैयार नहीं हुए तो उनके लिए साफ पानी और खाने के पैकेट देने का काम भी शुरू कर दिया।

यह लोग अपने साथ खाने के कई पैकेट रखते हैं जो कि कोई संगठन या दानदाता दे जाता है उसे यह लोग बाढ़ में फंसे लोगों तक ले जाकर बार देते हैं दिन में सही चेक कर अपनी छोटी सी नाव में गली मॉलों में लगाते रहते हैं ताकि यदि किसी को सुरक्षित स्थान पर जाने की जरूरत है या आने या पीने के साफ पानी की जरूरत है तो उसे यह पहुंचा देते हैं क्योंकि मोहल्ले के रहने वाले भी हैं तो ऐसे में इन लोगों को समझाने ज्यादा परेशानी भी नहीं आती जब फलों से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि सरकारी सहायता भले ही 48 घंटे बाद भी नहीं पहुंच पाई ही रहा है लेकिन इन मच्छरों के कारण उन्हें खाना और पीने का साफ पानी लगातार मिल रहा है।

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