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जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी नेशनल कांफ्रेंस

बीजेपी को लोकसभा चुनावों में घेरने के लिए कांग्रेस पार्टी ने जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस के साथ गठबंधन कर लिया है। कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि जम्मू और उधमपुर सीट पर कांग्रेस लड़ेगी जबकि फारूक अब्दुल्ला श्रीनगर से चुनाव लड़ेंगे। 2014 में यह सीट पीडीपी के पास थी, लेकिन उसके बाद हुए उपचुनावों में इसपर नेशनल

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (20 मार्च): बीजेपी को लोकसभा चुनावों में घेरने के लिए कांग्रेस पार्टी ने जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस के साथ गठबंधन कर लिया है। कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि जम्मू और उधमपुर सीट पर कांग्रेस लड़ेगी जबकि फारूक अब्दुल्ला श्रीनगर से चुनाव लड़ेंगे। 2014 में यह सीट पीडीपी के पास थी, लेकिन उसके बाद हुए उपचुनावों में इसपर नेशनल कांफ्रेंस के फारुक अब्दुल्ला का कब्जा हो गया।इसके साथ ही अनंतनाग, बारामूला और लद्दाख में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच दोस्ताना स्पर्धा होगी। यानी दोनों ही दलों में किसी भी एक के जीतने का फायदा दूसरे को भी मिलेगा। जम्मू-कश्मीर की 6 लोकसभा सीटों पर पांच चरणों में मतदान होने हैं। 2014 के चुनावों में कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस को 6 सीटों में से एक पर भी जीत हासिल नहीं हुई थी। उस समय लद्दाख, उधमपुर और जम्मू की सीट पर बीजेपी ने कब्जा किया था तो बारामुला, श्रीनगर और अनंतनाग की सीट पीडीपी के खाते में आई थी।ऐसे में बीजेपी और पीडीपी को हराने के लिए कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस में गठजोड़ बहुत ही जरूरी था, जिसको की आज हरी झंडी भी मिल गई। गठबंधन होने के बाद एनसी नेता फारुक अब्दुल्ला ने कहा कि इस समय जम्मू-कश्मीर के लोग भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे संघर्ष में पिसते रहते हैं। उन्हें निजात दिलाने के लिए धर्मनिरपेक्ष ताकतों की जरूरत है। चुनाव किसी भी धर्म को आधार बनाकर नहीं होना चाहिए। अगर हम इसी तरह आपस में संघर्ष करते रहेंगे तो इसका फायदा चीन और पाकिस्तान उठाएगा। इसी धर्मनिरपेक्षता को बरकरार रखने के लिए कांग्रेस ने कई कुर्बानिया दी हैं।आपको बता दें कि फारुक अब्दुल्ला यूपीए-2 के दौरान केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। फारुक के बाद पुत्र उमर अब्दुल्ला ने 2002 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी की कमान संभाल ली और फारूक अब्दुल्ला ने राज्यसभा के रास्ते दिल्ली की सियासत का रुख किया। 2009 में उन्हें फिर से चुन लिया गया, लेकिन 2009 के आम चुनाव में उन्होंने श्रीनगर लोकसभा सीट से जीत दर्ज की और कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री बने।2014 के चुनाव में फारूक फिर से श्रीनगर सीट से ही लड़े, लेकिन इस बार उन्हें पीडीपी प्रत्याशी तारीक हमीद करा के हाथों हार का मुंह देखना पड़ा। 2017 में हुए उपचुनाव में उन्होंने वापसी करते हुए बड़े अंतर से जीत दर्ज की।

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