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'एक्शन में इलेक्शन कमीशन' - मोदी-माया हों या योगी-आजम हो जायेंगे दांत खट्टे

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ और बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती पर कड़ी कार्रवाई के बाद चर्चा में आये चुनाव आयोग के पास 14 अप्रैल तक 334 शिकायतें ऐसी आयीं जिन पर उसे संज्ञान लेना पड़ा। खास बात यह कि इनमें सबसे गंभीर शिकायतें सत्ताधारी दल यानी बीजेपी के खिलाफ पायी गयीं। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर राफेल और सीबीआई के दुरुपयोग के लांछन लगाने वाली थीं

राजीव शर्मा, न्यूज24 ब्यूरो नई दिल्ली (15 अप्रैल): उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ और बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती पर कड़ी कार्रवाई के बाद चर्चा में आये चुनाव आयोग के पास 14 अप्रैल तक 334 शिकायतें ऐसी आयीं जिन पर उसे संज्ञान लेना पड़ा। खास बात यह कि इनमें  सबसे गंभीर शिकायतें सत्ताधारी दल यानी बीजेपी के खिलाफ पायी गयीं। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर राफेल और सीबीआई के दुरुपयोग के लांछन लगाने वाली थीं। यूं तो अब तक सबसे सख्त चुनाव आयुक्त टीएन शेषन और उनके बार लिंगदोह को माना गया, लेकिन जिस तरह से मुख्य निर्वाचन आयुक्त के निर्देशन में चुनाव आयोग ने कार्रवाईयां की हैं उससे लगता है कि इस बार का चुनाव राजनीतिक दलों को सबसे कड़े अनुभव देकर जायेगा। आचार संहिता लागू होने के एक माह के भीतर मिली शिकायतों में से 111 शिकायतें लंबित हैं और 108 शिकायतें को निस्तारित कर दिया गया है। इलेक्शन कमीशन की ओर से सबसे पहली कार्रवाई उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद के कैंट थाना क्षेत्र में बीजेपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ की गयी। इसी तरह आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई भी सबसे उत्तर प्रदेश में हुई। चुनाव आयोग के आदेश पर प्रताप गढ़ जनपद में बहुजनसमाज पार्टी के दो नेता अशोक त्रिपाठी और अजय पासी  के खिलाफ की गयी है।

चुनाव आयोग को सबसे महत्वपूर्ण शिकायत सी-विजिल के माध्यम से चंडीगढ़ से मिली। सी विजिल पर एक शिकायत कर्ता ने चुनाव आयोग को बताया कि सोशल मीडिया पर 'नेशन विद नमो' नाम मतदाताओं को प्रभावित करने वाली सामग्री का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। चुनाव आयोग की जांच में यह शिकायत सही पायी गयी और आचार संहिता के उल्लंघन का मामला मानते हुए फेसबुक, ट्वीटर और इंस्टाग्राम व्हाट्सएप सहित सभी सोशल मीडिया प्लेट फॉर्म्स को ऐसी सभी पोस्ट, पेज हटाने के निर्देश दिये गये जिनसे किसी पार्टी विशेष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से प्रचार सामग्री परोसी जा रही थी।नमो टीवी के विषय में भी चुनाव आयोग को भी एक जागरूक मतदाता के माध्यम से जानकारी हासिल हुई थी। इस पर भी तुरंत संज्ञान लेकर आयोग ने नमो टीवी से ऐसे सभी कंटेंट हटाने के निर्देश दिये जिनके प्रसारण की अनुमति मोरल कोड ऑफ कंडक्ट मॉनिटरिंग कमेटी से हासिल नहीं की गयी थी। चुनाव आयोग में नरेंद्र मोदी, योगी आदित्य नाथ, अमित शाह और बीजेपी के कुछ बड़े नेताओं के अलावा कांग्रेस, राहुल गांधी, टीडीपी, वायएसआरसीपी और बीजेडी के बड़े नेताओं के खिलाफ दर्ज करवायी गयी है।

मध्यप्रदेश से मिली शिकायतों से तो ऐसा लगा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्य मंत्री शिवराज सिंह को लक्ष्य बनाकर नियोजित रूप से शिकायतें की गयीं। शिकायतकर्ताओं में विजेश लूणावत और जेपी धनोपिया के नाम खास हैं। चुनाव आयोग ने इन सभी शिकायतों की जांच प्राथमिकता से की मगर किसी भी शिकायत में आचार संहिता के उल्लंघन का मामला नहीं पाया गया। ऐसी शिकायतें कांग्रेस की गुजरात में हुई वर्किंग कमेटी की बैठक को लेकर की गयी। यह शिकायत बीजेपी के स्थानीय नेताओं की ओर की गयी थी। चुनाव आयोग ने बताया कि कांग्रेस ने इस आयोजन की पूर्व अनुमति ली थी और उसके लिए निर्धारित शुल्क भी जमा किया था।

(Images Courtesy:Google)

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