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उद्धव सरकार में मंत्रियों के विभागों का बंटवारा, जानिए किसे क्या मिली जिम्मेदारी

महाराष्ट्र (Maharashtra) विकास आघाड़ी के 6 मंत्रियों को काफी रस्साकशी के बीच विभाग मिल गए। उद्धव ठाकरे (Uddhav Thakre) सरकार ने मंत्रिमंडल (Cabinet) विभागों का बंटवारा कर दिया है। राज्य में 28 नवंबर को शिवसेना (Shiv Sena) एनसीपी (Ncp)

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सचिन परब, न्यूज 24 ब्यूरो, मुंबई(13 दिसंबर): महाराष्ट्र (Maharashtra) विकास आघाड़ी के 6 मंत्रियों को काफी रस्साकशी के बीच विभाग मिल गए। उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) सरकार ने मंत्रिमंडल (Cabinet) विभागों का बंटवारा कर दिया है। राज्य में 28 नवंबर को शिवसेना (Shiv Sena) एनसीपी (Ncp) और कांग्रेस (Congress) की सरकार बनी। तबसे यानी पंद्रह दिनतक बिना खाते के मंत्री रहे नेताओं को कम से कम यह पता चल गया कि, उन्हें करने क्या है। सभी पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं को संतुष्ट करते हुए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने शायद अपने प्रशासनिक अनुभव का दायरा बढ़ने तक खुद के पास कम महत्त्व के विभाग रखे है। बहरहाल, बताना जरुरी है कि, कांग्रेस और एनसीपी की मांगों की कैंची में फंसे उद्धव ठाकरे ने फिलहाल अपने आपको सुरक्षित किया है। मंत्रिमंडल विभाग के बंटवारे को देखते हुए यहीं समझ आता है।  

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मुम्बई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में 28 नवंबर को महाराष्ट्र विकास आघाड़ी सरकार के मुख्यमंत्री के तौर पर उद्धव ठाकरे के अलावा शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस के 6 नेताओं ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली। महत्त्वपूर्ण विभागों को लेकर महाराष्ट्र विकास आघाड़ी में शामिल तीनों पार्टियों मे खींचतान जारी थी। गृह, नगरविकास, राजस्व मंत्रालय को लेकर पेंच फंसा हुआ था। जिसके चलते विभागों के बटवारे के लिए पंद्रह दिन लंबा समय लगा। एनसीपी और कांग्रेस नेता किसी भी हालत में गृह और राजस्व मंत्रालय पर दावेदारी छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे। वहीं शिवसेना ने गृह और नगरविकास मंत्रालय अपने पास रखने की ठान रखी थी। गुरुवार को मंत्रिमंडल के विभागों की जारी हुई सूची ने साफ कर दिया कि, विभागों के बंटवारे में शिवसेना के ‘तीर-कमान‘ने लक्ष्यभेद कर दिया। शिवसेना के पास गृह, शहरी विकास, पीडब्ल्यूडी, उद्योग जैसे अहम मंत्रालय हैं। एनसीपी को नाराज़ करना खतरा मोल लेना है इस बात को बखूबी समझते हुए वित्त, जल संसाधन ग्रामीण विकास मंत्रालय एनसीपी को सौंपे गए हैं। कांग्रेस को राजस्व मंत्रालय की लॉटरी लग गयी है। राजस्व समेत उर्जा, शिक्षा महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय की जिम्मेदारी कांग्रेस के मंत्रियों पर होगी।

शिवसेना के कद्दावर नेता एकनाथ शिंदे के पास सबसे अहम माने जानेवाले गृह मंत्रालय और नगर विकास मंत्रालय का जिम्मेदारी सौंप दी गयी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री के करीबी सुभाष देसाई उद्योग, उच्च और तकनीकी शिक्षा, खेल, युवा, रोजगार मंत्री बन गए है। गौरतलब है कि, देवेंद्र फडणवीस मंत्रिमंडल में भी सुभाष देसाई पर उद्योग मंत्रालय की जिम्मेदारी थी। महाराष्ट्र में यूपीए के शासन काल में बतौर वित्त मंत्री लगातार 9 साल बजट पेश करने वाले एनसीपी के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल को फिर एक बार वित्त मंत्री पद का जिम्मा सौंपा गया है। जयंत पाटिल को हाउसिंग, खाद्य आपूर्ति, मजदूर मंत्रालय की दिया गया हैं। राजनैतिक विश्लेषकों के मुताबिक, वित्त मंत्रालय की चाबी सौंपते हुए उनकी उप मुख्यमंत्री पद की दावेदारी खारिज कर दी गई है। अब अजित पवार का उप मुख्यमंत्री पद का रास्ता साफ होता दिख रहा है। एनसीपी के फायरब्रैंड नेता छगन भुजबल को ग्रामीण विकास, सामाजिक न्याय, जल संसाधन और आबकारी मंत्रालय मिल गए हैं।

विधानसभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य कांग्रेस नेता बालासाहेब थोरात राजस्व, स्कूली शिक्षा, पशुपालन एवं मत्स्य पालन मंत्रालय मंत्री होंगे। कांग्रेस में पिछडे वर्ग के प्रतिनिधी और आक्रामक नेता नितिन राउत को पीडब्ल्यूडी, आदिवासी विका, अन्य पिछडा वर्ग विका, महिला एवं बाल कल्याण राहत एवं पुनर्स्थापन मंत्री बना दिया गया है। हालाकि, विभागों का बटवारा अस्थायी माना जा रहा है। महाराष्ट्र विधिमंडल का शीतकालीन सत्र 16 दिसंबर को नागपुर में शुरु हो रहा है। सत्र शुरु होने से महज चार दिन पहले मंत्रिमंडल विभागों का बटवारा हो गया हैं। मंत्री पद की शपथ ग्रहण करनेवाले नेताओं में कैबिनेट मंत्री पद का बटवारा शीतकालीन सत्र से पहले करना अनिवार्य था। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रिमंडल विभागों के बंटवारे से पहले उद्धव की कांग्रेस नेता बालासाहेब थोरात और विजय वडेट्टीवार के साथ लंबी बैठक चली, जिसमें एकनाथ शिंदे और सुभाष देसाई मौजूद थे। इसी बैठक में कांग्रेस को दिए जानेवाले विभागों का फार्म्युला तय हुआ।

मनचाहे मंत्री पद मिलने के बाद कांग्रेस अब विधानसभा स्पीकर पद के लिए अड़ी है। इसका हल शरद पवार, उद्धव ठाकरे और कांग्रेस नेताओं के बीच बैठक में ढ़ूंढा जा सकता है। उपर उपर से देखते हुए मंत्रिमंडल बटवारे में शिवसेना का ‘अपर हैंड’ नज़र आता है। मगर यह पार्टी की ‘शॉर्ट टर्म विक्ट्री’ हैं। शीतकालीन अधिवेशन के बाद शिवसेना के हिस्से के कई मंत्री पदों को लेकर एनसीपी आग्रही हो सकती है। महाराष्ट्र विकास आघाड़ी के गठन में शरद पवार की भूमिका सबसे महत्त्वपूर्ण रही है, यह बात बच्चा बच्चा जानता है और जिसे नज़रअंदाज़ करने के ‘बचपना’ शिवसेना नहीं करेगी। ‘मातोश्री‘ से ‘सिल्वर ओक’ शिफ्ट हो चुके रिमोर्ट कंट्रोल से बहुत कुछ ऑपरेट होना हैं।      

 


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