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राजस्थान: अंगारों पर चलकर त्रिदेवियों के मंदिर दर्शन के लिए पहुंचते हैं लोग

प्रतापगढ़ जिले के अचनारा के हिंगलाज चामुंडा कालिका त्रिदेवियों के मंदिर मे नवरात्रि समाप्ति के बाद दशहरे पर चुल का आयोजन प्राचीन काल से होता आया है।

के. जे. श्रीवत्सन, न्यूज 24 ब्यूरो, जयपुर (9 अक्टूबर): प्रतापगढ़ जिले के अचनारा के  हिंगलाज चामुंडा कालिका त्रिदेवियों के मंदिर मे नवरात्रि समाप्ति के बाद दशहरे पर  चुल का आयोजन प्राचीन काल से होता आया है। जिसमे  माता के भक्त नंगे पांव जलते अंगारों पर चलकर माँ के दर्शन को पहुँचते हैं। मान्यता है की चुल मे निकलकर माँ के दर्शन करने से शारीरिक कष्टों से छुटकारा मिलता है। नवरात्रि के समापन के साथ किया चुल का आयोजन चुल को नो गज लम्बी  सवा गज चौड़ी और  सवा गहरी बनाई गई  जिसमें लकड़ी जला कर अंगारे बनाए गए  शुरुआत में मंदिर के पंडाजी  धधकते हुए अंगारों पर चले उसके बाद  भक्तों ने अंगारों पर चलकर दर्शन किए।

भक्त बताते हैं कि माता  के आशीर्वाद से ना तो पैरों में जलन होती है ना छाले होते हैं अंगारों पर चलने पर कोई परेशानी भी नहीं होती है  मां के दर्शनों से कष्टों का निवारण होता है ।  नवरात्रि के अंतिम दिन शाम के समय दू र दराज से  श्रद्धालु माँ के दर्शन के लिए आते हैं और सुबह  अंगारों पर चलते है।

 ऐसे हुई चुल की शुरुआत

ग्रामीण बताते है की पूर्व मे इस मंदिर की  किसी को कुछ खास जानकारी नही थी  वर्ष  2009 मे  गांव के मुकेश सांसरी को माता का भाव आया व मंदिर मे विराजमान सभी प्रतिमा के बारे मे जानकारी बताई । जिसमें हिंगलाज ,चामुंडा ,कालका, बजरंगबली, शिव शंकर आदि देवी देवताओं के स्थान  बताएं।

 कुछ महीनो बाद गांव के नंदलाल बैरागी को चामुंडा व कालिका का भाव आया सैकड़ो वर्ष पूर्व यहा माँ  प्रसन्न थी। माँ के नाम पर मेला लगता था। मेले मे श्रद्धालु  पूर्व मे यहा बावड़ी व तालाब था उसमे स्नान कर मंदिर के सामने धधकते अंगारों (चुल)पर चलकर मां के दर्शन करते थे जिससे उनकी सभी पीड़ा बीमारी कष्ट मां हर लेती थी। इन सब बातों से प्रभावित होकर ग्राम वासियों ने 2012के आश्विन  नवरात्रि के समापन पर मंदिर में चुल का आयोजन शुरू किया। जो आज तक मातारानी के आशीर्वाद से चल रही है। जिसमे गांव के ग्रामीणों के द्वारा व्यवस्थाओ का पुरा सहयोग किया जाता हैं।

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