उम्मीदों से भी बेहतर रहा चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग, देश ऐसे दे रहा है ISRO को बधाई

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 जुलाई): भारत के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO की कामयाबी पर देश झूम रहा है। ISRO की कामयाबी पर देश आज एकबार फिर गौरवान्वित महसूस कर रहा है। ISRO ने सफलता पूर्वक अपना दूसरा मून मिशन Chandrayaan-2 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है।  ISRO ने आज दोपहर 2.43 बजे देश के सबसे ताकतवर बाहुबली रॉकेट GSLV-MK3 से लॉन्च किया। अब चांद के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने के लिए चंद्रयान-2 की 48 दिन की यात्रा शुरू हो गई है। करीब 16.23 मिनट बाद चंद्रयान-2 पृथ्वी से करीब 182 किमी की ऊंचाई पर जीएसएलवी-एमके3 रॉकेट से अलग होकर पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाना शुरू करेगा।

चंद्रयान-2 की सफलतापूर्वक लॉन्चिंग पर इसरो के चीफ के सिवन ने कहा कि हमने चंद्रयान-2 की तकनीकी दिक्कत दूर कर इस मिशन को अंतरिक्ष में भेजा। इसकी लॉन्चिंग हमारी सोच से भी बेहत हुई है। चांद की तरफ भारत की ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत हुई। चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। उन्होंने कहा कि अभी टास्क खत्म नहीं हुआ है। हमें अपने अगले मिशन पर लगना है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग पर इसरो के सभी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी।

प्रधानमंत्री मोदी ने चंद्रयान-2 की सफलतापूर्वक लॉन्चिंग के बाद बधाई देते हुए कहा कि चंद्रयान-2 जैसे प्रयास हमारे युवाओं को विज्ञान, उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान और नवाचार की ओर प्रोत्साहित करेंगे।

 साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा कि सबसे अधिक खुशी की बात यह है कि चंद्रयान-2 पूरी तरह से स्वदेशी मिशन है।

चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग के बाद लोकसभा और राज्यसभा में इसरो को बधाई दी गई। दोनों सदनों के नेताओं मेज थपथपाकर चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग का स्वागत किया। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया इसे ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत बताया है।

चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग के लिए पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इसरो की पूरी टीम को बधाई दी।

चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग पर कांग्रेस ने इसरो की पूरी टीम को बधाई दी है

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गौरतलब है कि अगर 15 जुलाई को चंद्रयान-2 सफलतापूर्वक लॉन्च होता तो वह 6 सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करता। लेकिन आज की लॉन्चिंग के बाद चंद्रयान-2 को चांद पर पहुंचने में 48 दिन ही लगेंगे। यानी चंद्रयान-2 चांद पर 6 सितंबर को ही पहुंचेगा। इसरो वैज्ञानिक इसके लिए चंद्रयान-2 को पृथ्वी के चारों तरफ लगने वाले चक्कर में कटौती होगी। संभवतः अब चंद्रयान-2 पृथ्वी के चारों तरफ 5 के बजाय 4 चक्कर ही लगाए।

Chandrayaan-2

आपको बता दें कि चंद्रयान-2 भारत का दूसरा सबसे महत्वाकांक्षी चंद्र मिशन है। इसे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से भारी-भरकम रॉकेट जियोसिन्क्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल-मार्क 3 (जीएसएलवी एमके 3) से लॉन्च किया गया। जीएसएलवी को 'बाहुबली' के नाम से भी पुकारा जाता है। यह रॉकेट 44 मीटर लंबा और 640 टन वजनी है। इसमें 3.8 टन का चंद्रयान रखा गया है। पृथ्वी और चांद की दूसरी करीब 3.844 किलोमीटर है। उड़ान के कुछ ही मिनटों बाद 375 करोड़ रुपये का जीएसएलवी-मार्क-3 रॉकेट 603 करोड़ रुपये के चंद्रयान-2 को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करेगा। वहां के चांद की यात्रा शुरू होगी। चंद्रयान-2 में लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान चांद तक जाएंगे। लैंडर विक्रम सितंबर या अक्टूबर में चांद पर पहुंचेगा और इसके बाद वहां प्रज्ञान काम शुरू करेगा।