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5000 से ज्यादा एटीएम और 600 बैंक के ब्रांचों के क्यों गिर गए शटर?

अगर आप भी नेटबैंकिंग और डिजिटल पेमेंट के फैन हैं तो क्या आपको पता है कि इस वजह से बैंकों को कितनी सुविधा हो रही है? अपना खर्च घटाने के लिए देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने बड़े शहरों में अपने एटीएम और ब्रांच की संख्या में कमी की है।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(22 अगस्त): आप अगर नेटबैंकिंग और डिजिटल पेमेंट के फैन हैं तो क्या आपको पता है कि इस वजह से बैंकों को कितनी सुविधा हो रही है? अपना खर्च घटाने के लिए देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने बड़े शहरों में अपने एटीएम और ब्रांच की संख्या में कमी की है। वास्तव में शहरी इलाके में ग्राहक नेटबैंकिंग और डिजिटल पेमेंट के नए कीर्तिमान बना रहे हैं। सरकारी बैंकों का कहना है कि ब्रांच और एटीएम जैसे फिजिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करना अब बेकार हो गया है।

शहरी इलाके में बैंकों को एटीएम और ब्रांच पर काफी रकम खर्च करना पड़ता है। देश के शीर्ष सरकारी बैंकों ने पिछले एक साल में 5500 एटीएम और 600 शाखाएं बंद कर दी हैं। देश के सरकारी बैंक वास्तव में बैलेंस शीट में खर्च घटाने की कोशिश के तहत ऐसा कर रहे हैं। नए लोन की सुस्त रफ्तार और बैड लोन के बढ़ते मामलों की वजह से बैंकों के लिए मुनाफा कमाने में समस्या दिख रही थी। अब खर्च घटाकर वे इसकी भरपाई कर रहे हैं।

शीर्ष दस बैंकों में से 9 सरकारी बैंकों ने ब्रांच और एटीएम की संख्या में कमी की है। यह कमी खासतौर पर शहरी इलाके में की गयी है। सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया के एमडी पल्लव महापात्रा ने कहा, "सरकारी बैंक शहरों में शाखा के साथ ही एटीएम का नेटवर्क घटा रहे हैं। ग्रामीण और कस्बाई इलाके में हम कटौती नहीं कर रहे हैं।"


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