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पाक का नापाक चेहरा फिर उजागर, हिंदु-सिखों और गैर मुस्लिमों के चुनाव लड़ने पर लगाई रोक

पाकिस्तान में हिंदु और सिखों को लेकर दोगली नीति और दुश्मनी का पर्दाफाश एक बार फिर हुआ है। पाकिस्तान में रहने वाले हिंदु-सिख या अन्य गैर मुस्लिम समुदाय अब बार काउंसिल का भी चुनाव नहीं लड़ पायेंगे।

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (11 जनवरी): पाकिस्तान में हिंदु और सिखों को लेकर दोगली नीति और दुश्मनी का पर्दाफाश एक बार फिर हुआ है। पाकिस्तान में रहने वाले हिंदु-सिख या अन्य गैर मुस्लिम समुदाय अब बार काउंसिल का भी चुनाव नहीं लड़ पायेंगे। पाकिस्तान में किसी बड़े संवैधानिक पद या शीर्ष पुलिस या आर्मी अफसर के पद पर तैनाती पर पहले से रोक है। अब बार काउंसिल के चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी गयी है। दरअसल यह कदम हिंदु-सिखों के साथ गैर मुस्लिम समुदायों को पाकिस्तान में चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की दिशा में एक कदम और बढाया गया है। हाल में सिखों के पवित्र गुरुद्वारे पर हुए हमले के बाद अब एक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। अब मुल्तान बार एसोसिएशन ने एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसके अनुसार, बार काउंसिल के चुनाव में कोई भी गैर मुस्लिम हिस्सा नहीं लड़ सकेंगे। इस चुनाव में अहमदिया मुस्लिम उम्मीदवार भी नहीं उतर सकेंगे। मुल्तान की डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के वकीलों की ओर से ये प्रस्ताव लाया गया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इसमें कहा गया कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार को अब एक शपथपत्र भी देना होगा, जिसमें उसे बताना होगा कि उनका विश्वास इस्लाम में है। ये प्रस्ताव ऐसे समय में पास किया गया है, जब पूरी दुनिया में पाकिस्तान अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमले के कारण आलोचना का शिकार हो रहा है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ लगातार अपराध की खबरें आ रही हैं। इनमें अल्पसंख्यकों का जबरल धर्मांतरण, महिलाओं से रेप, अपहरण जैसे अपराध हैं। जिन अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपराध हो रहे हैं उनमें हिंदू, क्रिश्चियन, सिख, अहमदिया और शिया मुस्लिम भी शामिल हैं।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को प्राय: निशाना बनाया जाता रहा है। पिछले दिनों पाकिस्तान में एक सिख युवक की हत्या होने पर विवाद हुआ था। बता दें कि गत चार जनवरी को अज्ञात बंदूकधारियों ने परविंदर सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। भारत ने गत रविवार को इस घटना को अल्पसंख्यक सिख समुदाय के सदस्य की ‘‘लक्षित हत्या’’ करार देते हुए इसकी कड़ी निन्दा की थी। हालांकि बाद में पुलिस ने यह दावा किया था कि परविंदर की हत्या उसी की मंगेतर ने कराई थी। मुस्लिम बहुल पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों की आबादी कुल आबादी की महज दो प्रतिशत है।Images Courtesy:Google


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