IMF को अमेरिकी चेतावनी से बढ़ी पाकिस्तान की मुश्किल, दो तिहाई आबादी के सामने भूखों मरने की नौबत

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (19 जून): एक तरफ इमरान सरकार को नेशनल एसेंबली में बजट पास कराने लाले पड़ रहे हैं, दूसरी तरफ आईएमएफ से मिल रहे कर्जे पर अमेरिकी प्रशासन की आपत्ति ने इमरान खान की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। अमेरिका ने आर्थिक संकट में फंसे पाकिस्तान को वित्तीय राहत पैकेज देने का करार करने पर अंतराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) से ‘कड़ी प्रतिक्रिया’ जताई है और कहा है कि उसे वित्तीय मदद ‘शर्तें लगा कर’ दी जानी चाहिए। अमेरिका के विदेश विभाग की एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी। ऐसा माना जा रहा  है कि आईएमएफ अमेरिकी चेतावनी की अनदेखी नहीं कर सकता और अगर आईएमएफ ने पाकिस्तान के सामने कर्ज देने से पहले कोई नई शर्त जोड़ दी तो इमरान सरकार को उसे पूरा करना मुश्किल होगा और अगर शर्त मान लीं तो इमरान को सरकार चलाना नामुमकिन हो जायेगा। कुछ भी हो, इतना साफ है कि दोनों ही परिस्थितियों में पाकिस्तान की दो तिहाई आबादी भुखमरी के कगार पर पहुंंच जायेगी।अमेरिकी सरकार को चिंता है कि पाकिस्तान आईएमएफ की वित्तीय मदद का उपयोग चीन से लिए कर्ज को चुकाने में कर सकता है। पाकिस्तान ने पिछले महीने 6 अरब डॉलर के राहत पैकेज के लिए आईएमएफ के साथ एक समझौता किया है। इस राशि का उपयोग पाकिस्तान अपने वित्तीय संकट को दूर करने और धीमी पड़ती अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में करेगा।

दक्षिण एवं मध्य एशिया मामलों के अमेरिकी विदेश विभाग की वरिष्ठ अधिकारी एलिस जी वेल्स ने कहा , " सशर्त पैकेज को लेकर चर्चा है। हमें लगता है कि पाकिस्तान के लिए सशर्त आईएमएफ पैकेज उपयुक्त होगा। सांसदों के प्रश्न के जवाब में पिछले हफ्ते उन्होंने विदेश मामलों की उपसमिति को बताया , अमेरिका को आईएमएफ पैकेज के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है , लेकिन आईएमएफ और पाकिस्तान सरकार में एक समझौता बना हुआ है। "

उन्होंने कहा कि हमने राहत पैकेज के मुद्दे पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने भी सार्वजनिक रूप से कहा कि किसी भी राहत पैकेज में संरचनात्मक सुधार होना जरूरी है

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