पब्लिक सेक्टर बैंकों में हुए फ्रॉड के 85 फीसदी मामले: RBI

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (27 जून): आरबीआई की हालिया फाइनैंशल स्टेबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक इस साल बैंकिंग फ्रॉड के लगभग 6,500 मामले इस साल सामने आए हैं। इनमें से 85 फीसदी मामले पब्लिक सेक्टर बैंकों के हैं। इनमें 30,000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है।रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में हुए टॉप 10 फ्रॉड में बैंकों को 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का चूना लगा है। फाइनैंशल इयर 2017 में बैंकों को लगभग 5,000 फ्रॉड में लगभग 20,000 करोड़ का लॉस हुआ था।

बैंकिंग रेग्युलेटर ने कहा है, 'हाल के वर्षों में इंडियन बैंकिंग सेक्टर में 1 लाख से ज्यादा के फ्रॉड की संख्या और उसमें होने वाले लॉस में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

अगर इस मोर्चे पर पब्लिक और प्राइवेट की तुलना करें तो पाएंगे कि 85 फीसदी फ्रॉड के मामले सरकारी बैंकों के साथ हुए हैं। हालांकि उनका कारोबारी शेयर इतना ज्यादा नहीं है।' 2017-18 के दौरान बैंकिंग फ्रॉड में सबसे ज्यादा उछाल लोन से जुड़े मामलों में आई है। इसकी सबसे बड़ी वजह कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग से जुड़े स्कैम में हुई बढ़ोतरी है। आरबीआई के डेटा के मुताबिक बैंकिंग सेक्टर में जितने फ्रॉड हुए हैं, उनमें पब्लिक सेक्टर बैंकों का शेयर उनके क्रेडिट और डिपॉजिट शेयर के मुकाबले बहुत ज्यादा है। क्रेडिट में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी 65% है जबकि डिपॉजिट में उनका शेयर 75% है। रेगुलेटर ने रिपोर्ट में लिखा है, 'लोन में सरकारी बैंकों का जितना मार्केट शेयर है उससे कहीं ज्यादा उनमें फ्रॉड हुआ है।

इसकी वजह इन बैंकों में फर्जीवाड़ा करनेवालों पर कंट्रोल वाले इंटरनल सिस्टम में सुस्ती हो सकती है, जिसके चलते नॉन पीसीए वाले पीएसपी के स्ट्रेस्ड एसेट पोजिशन बढ़ गई।'