देश में 826 हाउसिंग प्रोजेक्ट 4 साल की देरी का सामना कर रहे



ऩई दिल्ली(9 अप्रैल): मेहनत की गाढ़ी कमाई जोड़कर हर आदमी खुद के घर के सपने को पूरा करने की कोशिश करता है, लेकिन तकलीफ तब होती है जब बिल्डर अपने वादों के मुताबिक तय समय पर घर की डिलीवरी नहीं करते हैं और फिर यहां के शुरू होती है फ्लैट खरीदारों की मुसीबत।


- एक रिपोर्ट की मानें तो  देश में 826 आवासीय परियोजनाएं लगभग तीन से चार साल की देरी का सामना कर रही हैं।


- उद्योग संगठन एसोचैम के एक अध्ययन के मुताबिक, दिसंबर 2016 के अंत में 2,300 से अधिक रियल एस्टेट परियोजनाएं विकसित की गई थीं और इनमें से 826 आवास और 60 व्यावसायिक परियोजनाओं को देरी का सामना करना पड़ा।


- अधिकतम देरी पंजाब में 48 महीनों की हुई। इसके बाद तेलंगाना (45 महीने), पश्चिम बंगाल (44 महीने), उड़ीसा (44 महीेने) और हरियाणा(44 महीने)। मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश में 42 महीने की देरी हुई। महाराष्ट्र में परियोजना डिलीवरी में 39 महीने की देरी हुई, वहीं कर्नाटक में 31 महीने यानी कम देरी देखने को मिली।


- रियल स्टेट और हाउसिंग सेक्टर कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनमें हो रही देरी न केवल आवास क्षेत्र में निवेश को हतोत्साहित करती है, बल्कि देरी और भ्रष्टाचार का भी कारण बनती है।


- एसोचैम ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को रियल एस्टेट परियोजनाओं को मंजूरी के लिए एक सिंगल-विंडो सिस्टम लागू करना चाहिए। अचल संपत्ति परियोजनाओं के नियामक की बजाय सरकार को एक सुविधा के रूप में कार्य करना चाहिए।