देश के इन 8 राज्यों में एक भी लाइसेंसी बूचड़खाना नहीं

नई दिल्ली(17 अप्रैल): देश में केवल 1,707 बूचड़खाने फूड सेफ्टी ऐंड स्टैंडर्ड ऐक्ट 2006 के तहत पंजीकृत हैं। उत्तर प्रदेश समेत अलग-अलग राज्यों में अवैध बूचड़खानों के खिलाफ मुहिम शुरु किए जाने के बीच दायर एक आरटीआई से यह जानकारी मिली है।


-  इस आरटीआई से पता चला है कि सबसे ज्यादा पंजीकृत बूचड़खाने वाले सूबों की फेहरिस्त में क्रमश: तमिलनाडु, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र शीर्ष तीन स्थानों पर हैं। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश और चंडीगढ़ समेत आठ राज्यों में एक भी बूचड़खाना पंजीकृत नहीं है।


- मध्यप्रदेश के नीमच निवासी आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड ने रविवार को बताया कि फूड सेफ्टी ऐंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने उन्हें ये आंकड़े फूड लाइसेंसिंग ऐंड रजिस्ट्रेशन सिस्टम के जरिए उपलब्ध जानकारी के आधार पर दिए हैं।


-  उन्होंने कहा, 'मुझे आरटीआई के तहत मुहैया कराए गए इन आंकड़ों की रोशनी में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश में कितनी बड़ी तादाद में अवैध बूचड़खाने चल रहे हैं।'


- गौड की आरटीआई अर्जी पर भेजे जवाब में एफएसएसएआई के एक अफसर ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा-नगर हवेली, दमन-दीव, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा में एक भी बूचड़खाना फूड सेफ्टी ऐंड स्टैंडर्ड ऐक्ट 2006 के तहत पंजीकृत नहीं है। आरटीआई से मिली जानकारी में यह भी खुलासा हुआ है कि आठों राज्यों में ऐसा एक भी बूचड़खाना नहीं है, जिसने केंद्रीय या राज्यस्तरीय लाइसेंस ले रखा हो।


-  एफएसएसएआई ने बताया कि तमिलनाडु में 425, मध्यप्रदेश में 262 और महाराष्ट्र में 249 बूचड़खाने पंजीकृत हैं। यानी देश के कुल 55 फीसद पंजीकृत बूचड़खाने इन्हीं तीन सूबों में चल रहे हैं।

  

- उत्तर प्रदेश में 58 बूचड़खाने पंजीकृत हैं, जहां अवैध बूड़खानों के खिलाफ नवगठित योगी आदित्यनाथ सरकार की कार्रवाई चर्चा में है। आंध्रप्रदेश में एक, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में नौ, असम में 51, बिहार में पांच, छत्तीसगढ़ में 111, दिल्ली में 14, गोवा में चार, गुजरात में चार, हरियाणा में 18, हिमाचल प्रदेश में 82, जम्मू-कश्मीर में 23, झारखंड में 11, कर्नाटक में 30, केरल में 50, लक्षद्वीप में 65, मणिपुर में चार और मेघालय में एक बूचड़खाने को पंजीकृत किया गया है।

ओडिशा में पांच, पुडुचेरी में दो, पंजाब में 112, राजस्थान में 84, उत्तराखंड में 22 और पश्चिम बंगाल में पांच बूचड़खाने फूड सेफ्टी ऐंड स्टैंडर्ड ऐक्ट 2006 के तहत पंजीकृत हैं। एफएसएसएआई ने आरटीआई के जवाब में यह भी बताया कि देश भर में 162 बूचड़खानों को प्रदेशस्तरीय लाइसेंस मिले हैं। पशु अधिकार संगठन (पेटा) इंडिया ने मोटे आकलन के हवाले से कहा कि देश में अवैध या गैर लाइसेंसी बूचड़खानों की संख्या 30,000 से ज्यादा है। हालांकि, कई लाइसेंस प्राप्त बूचड़खानों में भी पशुओं को बेहद क्रूरतापूर्वक मारा जाता है। पेटा इंडिया ने सभी राज्यों और केंद्र सरकार से अवैध बूचड़खाने बंद कराने की अपील की है।