गोरखा राइफल्स ने पूरे किए 200 साल, जानें इससे जुड़ी दिलचस्प बातें

नई दिल्ली ( 9 नवंबर ): सैम 'बहादुर' मानेकशॉ देश के पहले फील्ड मार्शल थे जो गोरखा राइफल्स रेजिमेंट में एक अधिकारी थे। एक बार उन्होंने गोरखाओं की शूरवीरता पर कहा था कि अगर कोई व्यक्ति कहता है कि वह मरने से डरा नहीं है, तो वह या तो झूठ है या गोरखा है। सैम मानेक शॉ की इस कहावत से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितने निडर होते होंगे गोरखा सैनिक। इंडियन आर्मी की गोरखा रेजिमेंट के बारे में माना जाता है कि ये सेना की सबसे जांबाज इकाई है। गोरखा सैनिक किसी भी समय कैसे भी हालात से लड़ने को तैयार रहते हैं। आज हम बता रहे हैं गोरखा रेजिमेंट से जुड़े कुछ ऐसे ही तथ्य जिनके बारे में आप शायद ही जानते होंगे। 

गोरखा राइफल्स रेजिमेंट ने अपने 200 साल पूरे किए हैं। इस अवसर पर गोरखा राइफल्स के बारे में कुछ दिलचस्प बातें।

सबसे पहले गोरखाओं को सैनिकों के रूप में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भर्ती किया था। लेकिन सेना के अधिकारियों का तर्क था कि वास्तव में, महाराजा रणजीत सिंह ने 1809-1818 के आसपास सिख सेना में गोरखाओं की एक बटालियन की स्थापना की थी। 

वर्तमान में भारतीय सेना के सात गोरखा राइफल रेजिमेंट (1, 3, 4, 5, 8, 9 और 11 वें) में लगभग 32,000 नेपाली गोरखा सेवारत हैं। 1947 में स्वतंत्रता के बाद 2, 6, 7 वें और 10 वीं रेजिमेंट ब्रिटिश सेना में चले गया। ये अब ब्रिटिश सेना में एक गोरखा रेजिमेंट में रूप में काम कर रहा है।

वर्तमान में सेना प्रमुख बिपिन रावत गोरखा राइफल्स से हैं। वास्तव में कई सेना प्रमुख गोरखा रेजिमेंटों में अधिकारी रहे हैं।