7वें वेतन आयोग के साइड इफेक्ट्स: खर्चे के बोझ से फूला रेलवे का दम!

कुंदन सिंह, नई दिल्ली (30 जून): सातवें वेतन आयोग के कई साइड इफेक्ट हो रहे हैं। वेतन के बोझ तले कराह रही रेलवे की सातवें वेतन आयोग ने और सांसें फूला दी है। करीब 24 हजार करोड़ का बोझ भारतीय रेल पर बढ़ेगा। आखिर, कहां से आएगा- इतना रुपया? 

केंद्रीय कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का तोहफा देते वक्त वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ये तो बता दिया कि देश की सबसे बड़ी नौकरी देने वाली संस्था रेलवे पर करीब 23 हजार करोड़ का बोझ आएगा । लेकिन, ये नहीं बताया कि जिस रेलवे का खजाना पहले से खाली है। वो अपने कर्मचारियों को मोटी तनख्वाह कहां से देगी।

रेलवे की कमाई का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों की तनख्वाह में चला जाता है। कमाई के साधन बहुत सीमित हैं। सबसे पहले आपको बताते हैं कि रेलवे पर कहां और कितना बोझ बढ़ेगा। 2016-17 में सैलरी के मद में 12 हजार करोड़ का बोझ और बढ़ेगा। पेंशन के मोर्चे पर करीब 9 हजार करोड़ का बोझ बढ़ेगा। भत्तों के नाम पर 5-10 हजार करोड़ का बोझ बढ़ सकता है।

ऐसे में रेलवे पर 25 से 30 हजार करोड़ रुपये का बोझ बढ़ना तय है। रेलवे की हालत पहले से ही पतली है। अब रेलवे के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस खर्चें के लिए पैसा जुटाने की है। कमाई बढ़ाने के लिए रेलवे कुछ खास उपाय कर रहा है।

1. हर स्तर पर  15 से 20% खर्चे में कटौती का लक्ष्य  2. स्टाफ में कटौती करना, कम लोगों से ज्यादा काम लेने की तैयारी 3. नए तरीकों से 300 करोड़ की जगह करीब 1700 करोड़ कमाई का लक्ष्य 4. माल ढुलाई से कमाई बढ़ाने का लक्ष्य 5. ईंधन खर्चे में 15% कम करने का लक्ष्य 6. यात्री किराए से आय बढ़ाने की तैयारी 7. नई ट्रेनों से आमदनी बढ़ने की उम्मीद

इस बीच रेल राज्य मंत्री ने साफ कर दिया कि फिलहाल रेल किराए में बढ़ोत्तरी का कोई इरादा नहीं है। पहले से जमा पेशन फंड और दूसरे फंड से इस बार रेलवे का काम चल जाएगा। लेकिन, तमाम उपायों के बाद भी 25 से 30 हजार करोड़ रुपये का बोझ रेलवे की सेहत और बिगाड़ सकता है।