केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ा झटका देने की तैयारी में सरकार

नई दिल्ली (20 दिसंबर): केंद्र सरकार ने 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से लागू कर दिया है, लेकिन भत्ते को लेकर अबतक असमंजस की स्थिति बनी हुई है और अगर सबकुछ ठीक रहा तो भत्ते में बदलाव अगले वित्तवर्ष से ही मिल पाएगा।

दरअसल वेतन आयोग की कई सिफारिशों पर केंद्रीय कर्मचारियों ने कड़ी अपत्ति जताई थी। जिसके बाद सरकार ने अलग-अलग मुद्दों पर बातचीत के लिए जुलाई में तीन समितियों का गठन किया था। इन समितियों को कर्मचारी नेताओं से बातचीत करके चार महीनों में अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी। लेकिन सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक बातचीत अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है और अब सरकार ने इन समितियों का कार्यकाल 22 फरवरी 2017 तक के लिए बढ़ा दिया है।

गौरतलब है कि 7वें वेतन आयोग की रिपोर्ट के लागू होने के साथ ही कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम वेतनमान पर अपनी असहमति जताई थी। कर्मचारी संगठनों ने सरकार 18000 रुपये के न्यूनतम वेतनमान को 24000 रुपये करने की मांग की थी।

इसके अलावा कर्मचारियों ने भत्तों को लेकर भी असंतोष जताया था। वेतन आयोग ने 196 भत्तों में या तो कई को समाप्त कर दिया या फिर उनका विलय कर दिया। केंद्र सरकार संगठनों का कहना है कि कई भत्तें अंग्रेजों के समय से मिलते आ रहे हैं लिहाजा उन पर रोक ठीक नहीं है।

भत्ते के मुद्दे को सुलझाने के लिए सरकार ने वित्त सचिव अशोक लवासा के नेतृत्व में समिति का गठन किया गया। इस समिति को चार महीने में रिपोर्ट देनी थी लेकिन अभी तक रिपोर्ट तैयार नहीं हुई है। अब इस समिति के कार्यकाल को 22 फरवरी तक के लिए बढ़ा दिया गया है।

वहीं, RBI गर्वनर प्रमुख उर्जित पटेल ने अपने एक बयान में कहा है कि यदि किसी भी प्रकार से सरकार कर्मचारियों के भत्तों में इजाफा करती भी है तो यह मार्च 2017 के बाद से लागू होगा। साफ है कि अब कर्मचारियों को बढ़ा भत्ता (अगर सरकार की समिति इस संबंध में रिपोर्ट पेश करती है और सरकार इसे स्वीकार करती है) मार्च 2017 के बाद यानी अगले वित्तवर्ष से ही मिलेगा।

आपको बता दें कि 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर कर्मचारियों की नाराजगी के बाद उठे सवालों के समाधान के लिए सरकार की ओर से तीन समितियों के गठन का ऐलान किया गया था। 7वें वेतन आयोग की रिपोर्ट में अलाउंस को लेकर हुए विवाद से जुड़ी एक समिति बनाई गई है। दूसरी समिति पेंशन को लेकर बनाई गई है और तीसरी समिति वेतनमान में कथित विसंगतियों को लेकर बनाई गई है।