'पत्नी की संदिग्ध हालात में मौत तो उसकी संपत्ति पर पति का हक़ नहीं'

नई दिल्ली ( 20 जनवरी) :  सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि अगर किसी महिला की शादी के 7 साल के भीतर ही संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाती है तो उसका पति उस संपत्ति या स्त्रीधन पर हक़ नहीं जता सकेगा जो कि उसे उपहार स्वरूप दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही इस तरह के मामले को दहेज हत्या के दायरे में लाने का आदेश दिया।

चीफ जस्टिस टी एस ठाकुर, जस्टिस ए के सीकरी और जस्टिस भानुमति ने साफ़ किया कि स्वाभाविक मौत की स्थिति में ही महिला के उत्तराधिकारी संपत्ति पाने के हक़दार होंगे। लेकिन अगर महिला की मौत शादी के 7 साल के भीतर ही संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है तो उसकी संपत्ति उसके बच्चों को सौंपी जाएगी। अगर बच्चे नहीं हैं तो महिला के माता-पिता को वह संपत्ति मिलेगी।

दहेज रोकथाम अधिनियम की धारा 6 का उल्लेख करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दहेज से जुड़ी वस्तुओं को शादी के तीन महीने के अंदर महिला को सौंप देना चाहिए। अगर निर्धारित वक्त में पति या ससुराल वाले चल या अचल संपत्ति को वापस नहीं करते तो उनके ख़िलाफ़ अभियोग चलाया जा सकता है।

बेंच ने कहा कि पति या ससुराल वाले अगर दहेज से जुड़ी चीज़ें नहीं लौटाते तो वे दहेज अपराध के दोषी होंगे और उन्हें दो साल तक जेल की सज़ा हो सकती है। अगर वो दोषी साबित होते हैं तो भी उन्हें ये चीज़ें महिला को लौटानी होंगी।

सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश उस व्यक्ति की याचिका पर दिया जिसकी पत्नी की शादी के 15 महीने बाद ही संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी और उसे दहेज़ से जुड़ी वस्तुओं को लेकर अभियोग का सामना करना पड़ रहा है।