'दफ्तरों में काम के बढ़ते बोझ से जल्दी रिटायर होना चाहते हैं भारतीय'

नई दिल्ली (31 जनवरी): कामकाजी वर्ग पर काम का बोझ उनके उत्साह को लगातार कम करता जा रहा है। यही कारण है कि देश में 45 साल से ज्यादा उम्र के कामकाजी वर्ग के 61 फीसदी लोग अगले पांच साल में रिटायर होना चाहते है। इनमें से ज्यादातर लोगों का कहना है कि काम के दबाव से उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। यह निष्कर्ष हाल ही में किए गए एक सर्वे से सामने आया है।

रिपोर्ट के मुताबिक,वैश्विक बैंक एचएसबीसी ने हाल ही में एक सर्वे किया, जिसमें कहा गया है कि सेवानिवृत्त होने के रास्ते में सबसे बड़ी अड़चन वित्तीय दिक्कत है। एचएसबीसी के ताजा संस्करण 'स्वस्थ्य रहते हुए सेवानिवृत्ति नई शुरआत अध्ययन' में कहा गया है कि देश की 45 साल से अधिक की 61 फीसदी आबादी अगले पांच साल में रिटायर होना चाहती है। इनमें से 14 फीसदी मानते हैं कि वे ऐसा नहीं कर पाएंगे। ज्यादातर की राय थी कि वे वित्तीय परेशानी की वजह से सेवानिवृत्त नहीं हो सकते।

सर्वे में कहा गया है कि इस अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि भारतीयों को शुरुआत से ही बचत पर ध्यान देकर रिटायरमेंट की योजना बनानी चाहिए। भारत में 43 फीसदी लोग अगले पांच साल में रिटायर होकर अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताना चाहते हैं। 34 फीसदी यात्रा और अपनी अन्य रचियों को पूरा करने के लिए रिटायर होना चाहते हैं, जबकि 20 फीसदी कोई अन्य करियर या कोई अपना काम करना चाहते हैं। करीब 59 फीसदी लोगों का कहना था कि वे कार्य संबंधी दबाव तथा मुद्दों की वजह से रिटायर होना चाहते हैं। 

इसके अलावा 45 साल से अधिक की उम्र के 27 फीसदी लोग कामकाज के उनके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव की वजह से रिटायर होना चाहते हैं। जबकि 40 फीसदी का मानना है कि खराब स्वास्थ्य की वजह से रिटायरमेंट के लिए बचत करना कठिन होगा।