ब्लड बैंकों ने 5 सालों में 6 लाख लीटर खून किया बर्बाद

नई दिल्ली ( 24 अप्रैल ): समय पर खून न मिलने की वजह से अक्सर लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। पूरे देश में स्थित ब्लड बैंकों ने पिछले पांच सालों में बेशकीमती इंसानी खून और इसके जरूरी अंश की 28 लाख यूनिट्स यूं ही बर्बाद कर दिया। इससे देश के ब्लड बैंक सिस्टम पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। देश के ब्लड बैंकिंग सिस्टम में भी भारी कमियां सामने आई हैं। अगर लीटर में जोड़ा जाए तो पांच सालों में करीब 6 लाख लीटर खून बर्बाद किया गया है। जोकि पानी वाले 53 टैंकर्स के बराबर है।


एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित खबर के मुताबिक भारत को हर साल औसतन 3 मिलियन यूनिट्स ब्लड की कमी का सामना करना पड़ता है। वहीं खून की बर्बादी के मामले में सबसे ऊपर महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों का नाम है। इन राज्यों में सिर्फ खून ही नहीं बल्कि रेड ब्लड सेल्स और प्लाज्मा जैसे जीवन बचाने वाले कॉम्पोनेंट्स तक की खूब बर्बादी हुई है। आंकड़ों पर नजर डाले तो सामने आता है कि 2016-17 में ही ब्लड की 6.57 लाख यूनिट्स की बर्बादी की गई है।


चिंता की बात ये है कि जितनी यूनिट बर्बाद की गई है उसमें 50 प्रतिशत यूनिट्स प्लाज्मा की है। जिसकी सेल्फ लाइफ करीब एक साल होती है, जोकि रेड ब्लड सेल्स और पूरे खून के इस्तेमाल की 35 दिनों की डेडलाइन से कहीं ज्यादा है। ये खुलासा याचिकाकर्ता चेतन कोठारी द्वारा दायर की गई आरटीआई के जरिए हुआ है। आरटीआई के जवाब में नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (Naco) ने डाटा मुहैया कराया है।

रेड ब्लड सेल्स की बर्बादी के मामले में टॉप तीन में महाराष्ट्र, यूपी और कर्नाटक हैं। जिसमें यूपी और कर्नाटक सबसे ज्यादा फ्रेश फ्रोजन प्लाजमा की बर्बादी में भी सबसे ऊपर हैं।


बता दें कि भारत में सालाना 30 लाख यूनिट खून की कमी पड़ती है। दुर्घटना के मामलों में अक्सर खून, प्लास्मा या प्लेटलेट्स की कमी मौत की वजह बन जाती है।