WHO: भारत में 31% एलोपैथिक डॉक्टर 12th पास, 57% फर्जी

नई दिल्ली (18 जुलाई): डब्ल्यूएचओ ने भारत में एलोपैथिक डॉक्टरों के बारे में ऐसा खुलासा किया है, जिसे जानने के बाद हर कोई हैरान है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में ज्यादातर डॉक्टर्स बगैर मेडिकल क्वालिफिकेशन के प्रैक्टिस कर रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2001 में देश में एलोपैथिक डॉक्टर होने का दावा करने वाले करीब 31% लोग सिर्फ सेकंडरी स्कूल लेवल (12th क्लास) तक शिक्षित थे। जबकि 57% लोगों के पास कोई मेडिकल क्वालिफिकेशन ही नहीं थी।

डब्ल्यूएचओ ने जताई यह चिंता: - 2001 में भारत में नेशनल लेवल पर एक लाख पॉपुलेशन पर सिर्फ 80 डॉक्टर थे। - इनमें से 36 डॉक्टर (एलोपैथिक, होमियोपैथिक, आयुवेर्दिक, यूनानी) के पास कोई मेडिकल क्वालिफिकेशन नहीं थी। - गांवों में सिर्फ 18.8% हेल्थकेयर वर्कर्स के पास ही मेडिकल क्वालिफिकेशन थी। - रिपोर्ट के मुताबिक गांवों में मौजूद 5 डॉक्टर में से सिर्फ एक ही मेडिसिन की प्रैक्टिस के लिए क्वालिफाइड है। - भारत में 1 लाख पॉपुलेशन पर 80 डॉक्टर और 61 नर्स हैं। जबकी चीन में इतनी पॉपुलेशन पर 148 डॉक्टर और 103 नर्स हैं। - देश को 7 लाख से ज्यादा डॉक्टर की जरूरत है, लेकिन मेडिकल यूनिवर्सिटीज हर साल सिर्फ 30 हजार डॉक्टर ही प्रोड्यूस कर पाती हैं। - 2001 में भारत में एक लाख लोगों पर सिर्फ 2.4 डेंटिस्ट थे। 58 जिलों में कोई डेंटिस्ट नहीं था। जबकि 175 जिले ऐसे थे जहां मेडिकल क्वालिफिकेशन वाला एक भी डेंटिस्ट नहीं था।

एमसीआई का क्या कहना है ? - मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) की सेक्रेटरी डॉ. रीना नैय्यर ने कहा- मुझे नहीं मालुम कि यह रिपोर्ट अभी तक ऑफिशियली एमसीआई के पास आई है या नहीं। - "लेकिन अगर कोई शख्स एलोपैथिक मेडिसिन की प्रैक्टिस कर रहा है और उसके पास रजिस्टर्ड मेडिकल क्वालिफिकेशन नहीं है तो उसे नीमहकीम ही कहा जाएगा।"